पर्यावरण प्रदूषण ( Environmental Pollution ) 2021

इस पोस्ट में हम मध्य प्रदेश संविदा शिक्षक वर्ग 3  पर्यावरण प्रदूषण ( Environmental Pollution ) 2021की परीक्षा में पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण टॉपिक पर्यावरण अध्ययन से संबंधित पर्यावरण प्रदूषण का अध्ययन करेंगे। मध्यप्रदेश में आयोजित होने वाली संविदा शिक्षक वर्ग 3 की परीक्षा में पर्यावरण अध्ययन  से 30 अंको के प्रश्न पूछे जाने हैं। जिसमें से पर्यावरण प्रदूषण से प्रश्न पूछे जाएंगे। इस पोस्ट में हमने पर्यावरण प्रदूषण थ्योरी को आप सभी के साथ शेयर किया है। आशा है यह आपके लिए उपयोगी साबित होंगे!!

पर्यावरण प्रदूषण ( Environmental Pollution )
पर्यावरण प्रदूषण ( Environmental Pollution )

पर्यावरण प्रदूषण ( Environmental Pollution )

विश्व के 35% भौगोलिक क्षेत्रफल पर बाढ़ का विस्तार है सूखे की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब वर्षा सामान्य से 25 से 50% कम हो।
जब मृदा अपने मूल स्वरूप तथा मूल गुण जैसे जनन क्षमता को खो देती है तो इसे मृदा अवनपन कहते हैं। जबकि मृदा की ऊपरी परत के बह जाने को मृदा क्षरण कहते हैं।
विश्व की  प्रमुख समस्याओं में से प्रदूषण वर्तमान युग की सबसे जटिल समस्या हो गई है।
शीशा ,पारा और आर्सेनिक, कैडमियम निकेल,मैग्नीज ताँबा,जस्ता, लोहा ,बीएचसी ,डीडीटी व फिनोल आदि रासायनिक सूक्ष्म जीवों द्वारा अप गठित नहीं हो पाते इसलिए इन्हें अनअपघट्य प्रदूषक कहते हैं।

                           प्रदुषण  (Pollution)

 
पर्यावरण में अवांछित पदार्थों के समाविष्ट हो जाने की प्रक्रिया जो जीवन के सम्मुख संकट उत्पन्न करती है प्रदूषण कहलाती है।
प्रदूषण दो प्रकार के होते हैं प्राथमिक प्रदूषण द्वितीयक प्रदूषण
प्राथमिक प्रदूषण प्रदूषण होते हैं जो अपने मूल स्वरूप में ही पर्यावरण में विद्यमान हैं जैसे प्लास्टिक CO2 ,Co आदि।
द्वितीयक प्रदूषण वह प्रदूषण है जो प्राथमिक प्रतिभाओं के आपसी अंतः क्रिया के कारण निर्मित होते हैं जैसे – O2  , No,  h2 so4

                        प्रदूषण के प्रकार

 
 
1. वायु प्रदूषण ( AirPollution )
 
वायु प्रदूषण में नाइट्रोजन 78.9% ऑक्सीजन 0.03% आर्गन 0.93% कार्बन डाइऑक्साइड0.03% हैं। इसके अलावा जलवाष्प, हाइड्रोजन, हीलियम, ओजोन, नियोन आदि गैस भी है।
ज्वालामुखी उद्गार से सल्फर डाइऑक्साइड तथा हाइड्रोजन सल्फाइड आदि भी खेली कैसे निकलती है।
खनिज तेल तथा कोयले से निकलने वाली गैस – Co2,Co, कार्बन मोनोऑक्साइड हैं।
गंधक युक्त जीवाश्म ईंधन के जलने से सल्फर के योगिक जैसे – सल्फर डाइऑक्साइड, हाइड्रोजन सल्फाइड ,सल्फर डाइऑक्साइड तथा h2 so4 निकलते हैं।
जीवाश्म ईंधन के अपूर्ण दहन से हाइड्रोकार्बन निकलते हैं।
सुपर सोनिक जेट विमानों एवं रासायनिक उर्वरकों से no2 तथा N2 के सभी ऑक्साइड तथा नाइट्रस ऑक्साइड नाइट्रिक ऑक्साइड , नाइट्रोजन ट्राईऑक्साइड इत्यादि योगिक वायु प्रदूषण हैं।
सूती वस्त्रों की विरंजन से विसर्जित होने वाली गैस  क्लोरीन है।
धान के खेतों तथा जुगाली करने वाले पशुओं से मीथेन उत्सर्जित होती है।
एरोसॉल हवा में लटके 1 माइक्रोन से 10 माइक्रोन आकार वाले ठोस या तरल कण है।

                      प्रमुख वायु प्रदूषक 

 
सीसा – उच्च ऑक्टेन मान प्राप्त करने के लिए पेट्रोल में पहले शीशा मिलाया जाता था , जो बाद में बंद कर दिया गया शीशा वायु मंडल के ऑक्सीजन से मिलकर लेड ऑक्साइड बनाता है।

 

 जो सांस के जरिए शरीर में पहुंचकर तंत्रिका तंत्र पर हानिकारक प्रभाव डालता है शरीर में मस्तिक से संबंधित बीमारियां जैसे – पागलपन लकवा तथा गुर्दों को क्षति पहुंचती है सीसा विषाक्तता को प्लाविज्म कहते हैं शीशे का कोई सुरक्षित नहीं है अल्प मात्रा भी शरीर में हानिकारक है बच्चों का बौद्धिक स्तर कम हो जाता है।
बेंजीन – शीशा ना मिलने से पेट्रोल का ऑक्टेन मांग घट जाता है अतः हिसाब पेट्रोल में उच्च ऑक्टेन मान प्राप्त करने के लिए कुछ योगिक जैसे बेंजीन जाइलिन मिलाये जााते है। इसे सर्वाधिक मात्रा बेंजीन की होती है इसके कारण रक्त कैंसर होता है।
NOTE – 1000 ब्लड कैंसर मरीजों में 50% मरीज पेट्रोल से निकलने वाली बेंजीन के कारण होते हैं.
सल्फर डाइऑक्साइड – वायु पुरुषों में सबसे खतरनाक गैस है पेट्रोल डीजल ताप विद्युत संयंत्रों से कोयले की बहन से तथा तेल शोधन शालाओं से सल्फर डाइऑक्साइड गैस की उत्पत्ति होती है।
खांसी सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन ,आदि परेशानियों का प्रमुख कारण सल्फर डाइऑक्साइड गैस है।
उत्तर प्रदेश के मथुरा में स्थित मथुरा रिफाइनरी से सल्फर डाइऑक्साइड से ताजमहल का क्षरण होता है इसे हम क्रैकिंग कहते हैं।
सल्फर डाइऑक्साइड वातावरण की नमी को अवशोषित कर h2 so4 बनाता है इससे अम्ल वर्षा होती है सल्फ्यूरिक अम्ल की वर्षा जल में सांद्रता बढ़ने पर पादप कोशिकाओं में प्रकाश संश्लेषण की दर कम होती है क्लोरोफिल नष्ट हो जाते हैं जलीय जीवो का विशेष कंठ प्रवाहित होता है जल का PH मान कम व अम्लीय ता बढ़ जाती है।
अम्ल वर्षा के जल का PH मान 5 से 2.5 के बीच होता है।
सामान्यतः अम्लीय मृदा का पीएच मान 4 से 6.5 के बीच होता है।
सल्फर डाइऑक्साइड गैस से विषाक्त कोहरे का भी निर्माण होता है।
Note – सिंदूर में शीशे का ऑक्साइड और कुमकुम में पारे का ऑक्साइड होता है पारे से अंग सूख जाते हैं दृष्टि धुंधली हो जाती है तथा मस्तिष्क को भारी नुकसान होता है।
 
नाइट्रोजन के ऑक्साइड – नाइट्रोजन पौधों के लिए मुख्य पोषक पदार्थ है लेकिन इसके ऑक्साइड हानिकारक ही होते हैं नाइट्रोजन पराक्साइड वायुमंडल की नमी से क्रिया करके नाइट्रिक अम्ल का निर्माण करते हैं जो वर्षा के साथ धरातल पर अम्ल वर्षा के रूप में गिरता है जो जीव धारियों के लिए घातक है।
दोस्तों पर्यावरण अध्ययन टॉपिक में पर्यावरण प्रदूषण का यह पहला पार्ट है प्रदूषण से संबंधित और भी जानकारियां हम आपको लगातार हमारे इस प्लेटफार्म पर लाते रहेंगे हम आपके भविष्य का आधार हैं हमें आप अपना प्यार देते रहिए।
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