Bharat Ka Prachin Itihas, भारत का प्राचीन इतिहास | भारत देश का नामकरण कैसे हुआ

भारत का प्राचीन इतिहास , Bharat Ka Prachin Itihas : नमस्कार दोस्तों आज हम  इतिहास क्या है,इतिहास के जन्मदाता कौन थे,इतिहास का विभाजन,भारतीय पुरातत्व विभाग के जनक, इतिहास की तिथियां,भारत देश का नामकरण कैसे हुआ,भारत में म्यूजियम का इतिहास,वर्तमान कैलेंडर कौन सा है इन विषयो के बारे में बिस्तर से बात करने बाले है।

इतिहास क्या है

इतिहास यूनानी शब्द “हिस्टोरिया” से बना है। जिसका शाब्दिक अर्थ “अन्वेषण से प्राप्त ज्ञान” है। इतिहास अतीत का अध्ययन है क्योंकि यह लिखित दस्तावेजों में वर्णित है।

ब्रिटिश के इतिहासकार Edward Gallery Carr ने अपनी पुस्तक What Is History मैं इतिहास की परिभाषा दी है इतिहास अतीत और वर्तमान के बीच एक अनंत संवाद है। Olympics Gk Question And Answers In Hindi | ग्रीष्मकालीन युवा ओलंपिक खेल 2018 – Easy 

इतिहास के जन्मदाता कौन थे

हैरी डोटस (Herodotus) यूनान का प्रथम इतिहासकार था। हैरी डोटस का संस्कृत नाम हरिदत्त था। हेरोडोटस हिस्ट्री शब्द के प्रथम प्रयोगकर्ता थे उन्होंने वास्तविक इतिहास लेखन की नींव रखी थी।

रोमन दार्शनिक सिसरो ने हेरोडोटस को इतिहास का जनक कहा।

हेरोडोटस ने अपने इतिहास का विषय पेलोपोनेसियन युद्ध को बनाया था। इसकी प्रसिद्ध पुस्तक हिस्टोरिका थी।

इतिहास का विभाजन

इतिहास को 3 वर्गों में विभक्त किया जा सकता है।

1. प्रागैतिहासिक काल – Bharat Ka Prachin Itihas

लिखित इतिहास के पहले कालखंड को प्रागैतिहासिक काल कहा गया है इस कालखंड के लोगों को लिपि या अक्षर का ज्ञान नहीं था.(Bharat Ka Prachin Itihas) यह आदिम लोगों का इतिहास पत्थर व हड्डियों के औजारों तथा उनकी गुफा चित्रकारी के आधार पर लिखा गया है पाषाण काल को इसके अंतर्गत रखा गया है.

2. आघ ऐतिहासिक काल

उस कालखंड का इतिहास जो ऐतिहासिक काल से पहले का है जब लिपि व अक्षर का ज्ञान था लेकिन आज भी उसे नहीं पढ़ा जा सकता है। आघ ऐतिहासिक काल के अंतर्गत आता है। इतिहास लेखन की दृष्टि से सिंधु घाटी की सभ्यता व वैदिक काल को इसी कालखंड में रखा गया है क्योंकि यह लिपि चित्रात्मक, प्रतीकात्मक है जिसका अर्थ निकालना बहुत कठिन है।

3. ऐतिहासिक काल

इतिहास का वह काल जिस से संबंधित लिखित सामग्री प्राप्त होती है एवं उसे पढ़ा जा सकता है भारत में यह काल छठवीं शताब्दी ईसा पूर्व से प्रारंभ होता है। इसमें महाजनपद काल से अब तक का कालखंड शामिल किया गया है.

bharat-ka-prachin-itiha

भारतीय पुरातत्व विभाग के जनक

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ब्रिटिश पुरातत्व शास्त्री विलियम जॉन्स द्वारा 15 जनवरी 1784 को स्थापित एशियाटिक सोसाइटी ऑफ़ बंगाल के उत्तराधिकारी थे। 1788 में इनका पत्र एशियाटिक रिसर्चेज प्रकाशित होना आरंभ हुआ था.(Bharat Ka Prachin Itihas) और 1814 में यह प्रथम संग्रहालय बंगाल में बना।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण अपने वर्तमान रूप में 1861 में ब्रिटिश शासन के अधीन सर अलेक्जेंडर कनिंघम द्वारा तत्कालीन वायसराय चार्ल्स जॉन कैनिंग की सहायता से स्थापित हुआ था।

पुरातत्व के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए कनिघम को भारतीय पुरातत्व का जनक कहा जाता है। सन 1944 में जब मॉर्टिमर व्हीलर महानिदेशक बने सब इस विभाग का मुख्यालय रेलवे बोर्ड भवन शिमला में स्थित था। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है।

इतिहास की तिथियां

अंग्रेजों में ईसा पूर्व ( B.C ) का तात्पर्य बिफोर क्राइस्ट से है। ईसा मसीह के जन्म से पूर्व का यह समय है कभी-कभी तिथियों से पहले ईस्वी लिखा जाता है यह एनो डॉमिनी नामक 2 लेटिन शब्दों से बना है। इसका तात्पर्य ईसा मसीह के जन्म के वर्ष से है।

आजकल A.D की जगह C.E तथा B.C के स्थान पर B.C.E का प्रयोग होता है। C.E अक्षरों का प्रयोग “कॉमन एरा” तथा B.C.E का “बिफोर कॉमन एरा” के लिए होता है। इन शब्दों का प्रयोग इसलिए करते हैं क्योंकि विश्व के अधिकांश देशों में अब “कॉमन एरा” का प्रयोग सामान्य हो गया है।(Bharat Ka Prachin Itihas)

कभी-कभी अंग्रेजी के B.P अक्षरों का प्रयोग होता है जिसका तात्पर्य पर बिफोर प्रेजेंट है। वर्तमान से पहले शब्दों का प्रयोग किया है।

भारत देश का नामकरण कैसे हुआ

इंडिया शब्द इंडस से निकला है, जिसे संस्कृत में सिंधु कहा जाता है। भारतवर्ष नाम सर्वप्रथम पाणिनीय अष्टाध्याई में आया है. भारत देश का यह नामकरण ऋगवेदिक काल के प्रमुख जन “भरत” के नाम पर किया गया।

वैदिक काल में उत्तरी भारत को आर्यावर्त कहा जाता था और दक्षिण भारत को दक्षिणापथ कहा जाता था। जैन कथाओं के अनुसार देश का यह नाम प्रथम जैन तीर्थ कर ऋषभदेव के बड़े पुत्र का नाम भारत था जो प्रतापी व शक्तिशाली राजा थे।

पौराणिक कथाओं के अनुसार पोरुब वंश के राजा दुष्यंत एवं शकुंतला के पुत्र भरत के नाम पर भारत दिया गया था। ब्राह्मण ग्रंथों में इस देश को भारतवर्ष कहा गया है.(Bharat Ka Prachin Itihas) विष्णु पुराण में समुद्र के उत्तर और हिमालय के दक्षिण में जो देश स्थित है उसका नाम भारत है क्योंकि यहां भारतीय संस्कृति निवास करती है।

भारत को जम्मू द्वीप का एक भाग भी माना जाता है। बौद्ध ग्रंथों में जंबूद्वीप उस भू-भाग को कहा गया है जहां ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी में मौर्य वंश का शासन था।

यूनानीयों ने भारतवर्ष के लिए इंडिया शब्द का प्रयोग किया जबकि मध्यकालीन लेखकों ने इस देश को हिन्द अथवा हिंदुस्तान नाम से संबोधित किया यह शब्द भी फारसी शब्द हिंदू से बना है।

यूनानी भाषा के इंडे के आधार पर अंग्रेज ईसे इंडिया कहते हैं। देश का वर्तमान नाम भारत की प्राचीन काल से प्रचलित रहा है इसका अर्थ भक्तों का देश है भारत एक प्राचीन कवि ने का नाम था।

भारतवर्ष का सर्वप्रथम उल्लेख हाथीगुंफा अभिलेख में मिलता है।

हिंदुस्तान शब्द का उल्लेख सर्वप्रथम 262 ईसवी के सासानि अभिलेख में मिलता है।

भारतीय इतिहास की महत्वपूर्ण तिथियां-

भारत में म्यूजियम का इतिहास

भारत में म्यूजियम का इतिहास काफी पुराना है। भारत का प्रथम म्यूजियम 1814 में कोलकाता में स्थापित किया गया था। एशियाटिक सोसाइटी ऑफ़ बंगाल द्वारा स्थापित यह म्यूजियम एशिया का सबसे पुराना और सबसे बड़ा म्यूजियम है।

इस म्यूजियम को इस उद्देश्य से स्थापित किया गया था.(Bharat Ka Prachin Itihas)जिससे यहां की कलात्मक वस्तुओं को संग्रहित कर देश से बाहर ले जाया जा सके। इस म्यूजियम में संग्रहित कई दुर्लभ व कलात्मक वस्तुओं को अंग्रेज शासकों द्वारा इंग्लैंड भेज दिया गया था।

भारत में 19वीं शताब्दी में राजा महाराजाओं ने न्यूज़ नियमों की स्थापना में विशेष सहयोग दिया फ्रांस की राज्य क्रांति के बाद म्यूजियम सामान्य व्यक्तियों के लिए खोल दिए गए। सन 18 सो 30 में जर्मनी के बर्लिन शहर में फोल्ट्स म्यूजियम का निर्माण किया गया। और आधुनिक ढंग का सबसे पुराना संग्रहालय ऑक्सफोर्ड में है जो सन 1679 में बना था।

अमेरिकन म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री को सबसे बड़ा म्यूजियम होने का दर्जा प्राप्त है। म्यूजियम में अनेक दुर्लभ वस्तुएं संग्रहित होती है इसलिए इन्हें ब्रिटिश सुरक्षा प्रदान की जाती है।

म्यूजियम डे की शुरुआत

म्यूजियम के प्रति लोगों में जागरूकता लाने संरक्षित करने में लोगों के योगदान देने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने इंटरनेशनल म्यूजियम डे मनाने की शुरुआत की प्रथम बार म्यूजियम डे सन 1983 में मनाया गया। प्रतिवर्ष 18 मई को वर्ल्ड म्यूजियम डे मनाया जाता है।

वर्तमान कैलेंडर कौन सा है

वर्तमान में ग्रेगोरियन कैलेंडर एक अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर है (Bharat Ka Prachin Itihas) इससे समूचे विश्व के देशों में मान्यता दी गई है और विश्व के अधिकांश हिस्सों में इसी कैलेंडर का प्रयोग किया जाता है।

इटली के डॉक्टर Aloysius Lilius द्वारा प्रस्तावित इस कैलेंडर की घोषणा 24 फरवरी 1582 को पोप ग्रेगरी ने की थी. इन्हीं के नाम पर इस कैलेंडर के नाम के साथ ग्रेगरी सबसे जुड़ा प्राचीन जूलियन कैलेंडर की अशुद्धियां सुधारने के लिए इसे प्रचलन में लाया गया ।

Spread the love

Leave a Comment