ध्वनि प्रदूषण पर निबंध | Dhavni Pradushan Par Nibandh | Quick Read

प्रस्तावना

ध्वनि मानव को ईश्वर का दिया एक अनोखा उपहार है. ( Dhavni Pradushan Par Nibandh) जिसके माध्यम से मानव आपस में बातचीत करते हैं पशु -पक्षी भी प्राकृतिक रूप से तरह-तरह की ध्वनियां निकालते हैं वास्तव में ध्वनि मानव की अभिव्यक्ति का साधन है किंतु यही ध्वनि जब शोर का रूप लेकर कानों पर अतिरिक्त दबाव डालने लगे तो उसे ध्वनि प्रदूषण कहा जाएगा।

ध्वनि प्रदूषण पर निबंध | Dhavni Pradushan Par Nibandh
ध्वनि प्रदूषण पर निबंध

आज विश्व की सबसे बड़ी समस्या बनता जा रहा है ध्वनि प्रदूषण वह अनुपयोगी ध्वनि जिससे मानव तथा जीव जंतुओं को समस्या होती है अर्थात जब ध्वनि मानव तथा जीव-जंतुओं पर अतिरिक्त दबाव डालने लगे तो उसे हम ध्वनि प्रदूषण कहते है। आज के युग में नए-नए कारखाने उद्योग धंधे मोटर वाहन और हवाई जहाज ध्वनि प्रदूषण को फैलाते हैं तथा कार्यालय में फैक्ट्री में मशीनरी निर्माण कार्य और तेज आवाज से चलने वाले संगीत भी ध्वनि प्रदूषण को फैलाते हैं।

कारखानो की मशीनों की तेज आवाज उद्योग धंधे ,रेलगाड़ी हवाई जहाज ,मोटर कार और यातायात के बढ़ते हुए अन्य साधनों एवं उनके कान फोड़ हॉर्न से से ध्वनि प्रदूषण फैलता है। इसके अलावा अनेक लोग दूसरों की सुविधा का ध्यान ना रखते हुए रेडियो टेप रिकॉर्डर लाउडस्पीकर डीजे जोर जोर से बजा कर धोनी प्रदूषण फैलाते हैं।

ध्वनि शब्द लैटिन भाषा के शब्द नोजिया से लिया गया है।
ध्वनि प्रदूषण को मापने की इकाई डेसिबल हैं। ध्वनि प्रदूषण की अधिकतम सीमा 75 से 85 डेसीबल अधिकतर देशों में निर्धारित की गई है।

ध्वनि प्रदूषण की परिभाषा

मैक्सवेल –  एक वह ध्वनि है जो अवांछनीय है एवं वायुमंडलीय प्रदूषण का एक प्रकार है।

डॉक्टर बी राय – वह ध्वनि जो कि मानव सुविधा स्वास्थ्य एवं गतिशीलता में हस्तक्षेप करती है या प्रभावित करती है वह ध्वनि प्रदूषण है।

 

ध्वनि प्रदूषण के प्रभाव

ध्वनि प्रदूषण के बढ़ते प्रभाव से मनुष्य का जीवन तनाव युक्त बनता जा रहा है। इस प्रदूषण से मनुष्य की सुनने की शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है इससे बहरापन तक हो सकता है इससे रक्तचाप बढ़ जाता है और मानव का तनाव बढ़ जाता है मानव के फेफड़ों पर भी इसका दुष्प्रभाव पड़ता है इससे शारीरिक एवं मानसिक रोग पनपते हैं।

ध्वनि प्रदूषण के बहुत गंभीर कारण हो सकते हैं ध्वनि प्रदूषण से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ते हैं इससे हृदय संबंधी रोग तनाव, चिड़चिड़ापन आदि रोग होते हैं। ध्वनि प्रदूषण से सुनने की शक्ति पर भी असर पड़ता है ध्वनि प्रदूषण केवल मनुष्य ही नहीं बल्कि जीव-जंतुओं को भी नुकसानदायक होती है। तेज ध्वनि प्रदूषण होने के कारण कई प्रजाति लुप्त होने के कगार पर हैं।

अन्य प्रदूषण की तरह ध्वनि प्रदूषण के प्रभाव भी कम खतरनाक नहीं है। VIP इलाकों और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए दिन और रात ध्वनि की सीमा निर्धारित की गई है.लेकिन देखा गया है कि लोगों द्वारा इसका दुरुपयोग होता है। अनेक प्रकार के शोर निरर्थक हैं तथा इनको कम करके संतुलन बनाया जा सकता है हमें यह समझना चाहिए कि ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने की संयुक्त जिम्मेदारी हम सभी की है।

  • तीव्र ध्वनि के कारण मनुष्य ठीक से सो नहीं पाता नींद पूरी ना होने के कारण स्वास्थ्य संबंधी रोग उत्पन्न हो जाते हैं एवं मनुष्य का स्वास्थ्य खराब हो जाता है।
  • ध्वनि प्रदूषण से श्रवण शक्ति धीरे-धीरे कम होने लगती है जिससे सुनने की क्षमता कम हो जाती है।
  • अत्यधिक तीव्र ध्वनि मानव के आराम एवं कुशलता को भी प्रभावित करती है परिणाम स्वरूप रक्षा वाहिनी या संकुचित हो जाती है रक्त प्रवाह में अत्यधिक मात्रा में एड्रिनल हार्मोन का स्त्राव होता है जिससे मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
  • अत्यधिक चोर को लगातार सुनने से मनोवैज्ञानिक विकृति उत्पन्न होती है।
  • अत्यधिक तीव्र ध्वनि जब भूमि सतह से टकराती है तो उसे इमारतों व खिड़कियों में चरचर आहट उत्पन्न होती है जिससे भवनों को क्षति पहुंचती है।
  • अत्यधिक शोर से गर्भस्थ शिशु में जन्मजात बहरापन हो सकता है क्योंकि गर्भ में पूर्ण रूप से विकसित होने वाला अंग कान हीं होता है।

 

ध्वनि प्रदूषण का समाज पर क्या प्रभाव पड़ता है

सामान्य प्रभाव

ध्वनि प्रदूषण का मानव स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। ध्वनि को सुनने बोलने पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है विद्यार्थियों शिक्षकों और वैज्ञानिकों की सेहत पर भी खराब असर पड़ता है।

मनोवैज्ञानिक प्रभाव

मानव वैज्ञानिकों का प्रथम है कि ध्वनि प्रदूषण का मानव व्यवहार तथा पशु पक्षियों के व्यवहार पर भी प्रभाव पड़ता है।

शारीरिक प्रभाव 

ध्वनि प्रदूषण से सुनने की शक्ति समाप्त हो जाती है और आदमी बहरा हो जाता है ब्लड प्रेशर ,प्रजनन तथा गर्भपात जैसी बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है।

तंत्रिका तंत्र

इसमें दर्द कानों में घंटी की ध्वनि तथा थकान होती है जिससे मानव शरीर की कार्यप्रणाली बुरी तरह प्रभावित होती है।

ध्वनि प्रदूषण को रोकने के उपाय

ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए सरकार में मानक तय किए हैं रैलियों में प्रयोग लाउडस्पीकर का प्रयोग बंद करके ध्वनि प्रदूषण को कम किया जा सकता है उद्योग धंधों कारखानों को शहरों से बाहर लगाकर ध्वनि प्रदूषण से बचा जा सकता है शादियों पार्टियों में तेज ध्वनि से गाना बजाना बंद करना चाहिए।

सरकार को नियम व कानून कठोरता के साथ लागू करना चाहिए इससे ध्वनि प्रदूषण को कम किया जा सकता है।

ध्वनि प्रदूषण अधिकतर मानव द्वारा किया जाता है इसलिए अगर हम स्वयं होर्न बजाना बंद कर दें। शादी पार्टियों में तेज आवाज में लाउडस्पीकर बजाना बंद कर दें। और मशीनों की नियमित रूप से अगर देखभाल करें तो उनसे आवाज नहीं आएगी और ध्वनि प्रदूषण में कमी आयेगी।

  • ध्वनि प्रदूषण के बारे में जनता में जागरूकता उत्पन्न करना चाहिए।
  • ऐसे उपकरणों का आविष्कार करना जिसमें कम आवाज हो।
  • कानों को ध्वनि प्रदूषण से बचाने के लिए कंडोम का प्रयोग करना।
  • शिक्षा संस्थानों को अस्पतालों को दूर स्थापित करने का प्रयास करना चाहिए।
  • सड़कों के पास भारी मात्रा में वृक्षारोपण से ध्वनि प्रदूषण का प्रभाव कम हो सकता है
  • ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए कड़े कानून बनाना चाहिए।
  • तीव्र ध्वनि उत्पन्न करने वाले कल कारखानों को आवासीय स्थलों से दूर स्थापित कर देना चाहिए।
  • मशीनों में तेज ध्वनि को कम करने के लिए साइलेंसर का उपयोग करना चाहिए।

प्रदूषण के प्रकार

प्रदूषण के कुछ सबसे महत्वपूर्ण प्रकार वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, मृदा प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण है।

वायु प्रदूषण

वायु प्रदूषण को सबसे खतरनाक प्रदूषण माना जाता है इस प्रदूषण का मुख्य कारण उद्योगों और वाहनों से निकलने वाला धुआं है इन स्रोतों से निकलने वाला हानिकारक हुआ लोगों के लिए सांस लेने में भी बाधा उत्पन्न कर देता है दिन प्रतिदिन बढ़ते उद्योगों और वाहनों ने वायु प्रदूषण में काफी वृद्धि कर दी है जिससे ब्रोकाईटिस और फेफड़ों से संबंधित कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं सामने आ रही है।

जल प्रदूषण

जल प्रदूषण भी सीधे समुद्री जीवन को प्रभावित करने वाला एक बड़ा प्रदूषण है। क्योंकि जलियजीव जीवित रहने के लिए पानी में पाए जाने वाले पोषक तत्व पर निर्भर रहते हैं। समुद्री जीव-जन्तुओ का धीरे-धीरे गायब होना वास्तव में इंसानों और जानवरों की आजीविका को प्रभावित कर रहा है। कारखाना ,उद्योग ,सीवेज सिस्टम आदि से निकलने वाले हानिकारक कचरा सीधे पानी के मुख्य स्रोतों जैसे नदियां झीलों और महासागरों में पहुचता है जिससे पानी दूषित हो जाता है दूषित पानी पीने से विभिन्न जल जनित रोग हो जाते हैं।

मृदा प्रदूषण

मृदा प्रदूषण उर्वरक ,फफूंद नाशक और कीटनाशकों और अन्य रासायनिक यौगिकों के अत्यधिक उपयोग के कारण होता है। यह मिट्टी पर पैदा होने वाली फसल को दूषित करता है और जब इसका सेवन किया जाता है तो इससे गंभीर बीमारियां होती है।

ध्वनि प्रदूषण

ध्वनि प्रदूषण का स्त्रोत भारी मशीनरी ,वाहन ,रेडियो ,टीवी स्पीकर आदि से उत्पन्न शोर है जो सुनने में समस्या और कभी-कभी बहरापन का कारण बनता है।

 

ध्वनि प्रदूषण के कारण

ध्वनि प्रदूषण के कुछ स्रोत प्राकृतिक भी हैं जैसे बिजली की गड़गड़ाहट ,बादलों का गर्जना ,ज्वालामुखी का फटना आदि लेकिन यह सब क्रियाएं बहुत कम होती है इसलिए इनसे ज्यादा प्रदूषण का खतरा नहीं होता है।

शहरी इलाकों पर सड़कों पर रोज लाखों वाहन चलते हैं। और साथ-साथ रेल ,हवाई जहाज ,जेट विमान आदि की ध्वनि सबसे ज्यादा ध्वनि प्रदूषण फैलाती है।

माध्यमिक क्षेत्रों में भी ध्वनि प्रदूषण काफी बड़ी मात्रा में होता है जहां फैक्ट्री और मिलों की बड़ी-बड़ी मशीनें जोरों से आवाज करती हैं और वायलर ,टरबाइन , ड्रायर आदि की आवाज तो इतनी ज्यादा होती है कि पास खड़े लोगों को आसपास की ध्वनि भी सुनाई नहीं देती।

त्योहारों शादी पार्टी आदि उत्सवों पर ध्वनि विस्तारक यंत्रों का बजना ध्वनि प्रदूषण का प्रमुख कारण है जो लोगों के साथ-साथ अन्य जीव वनस्पतियों को भी नुकसान पहुंचाते हैं।

मनोरंजन के साधन ( Dhavni Pradushan Par Nibandh) 

मनोरंजन के साधनों में सीडी प्लेयर ,टीवी ,रेडियो ,ध्वनि विस्तारक यंत्र ,वाशिंग मशीन ,पंखे ,कूलर आदि आते हैं। इन साधनों में इतना अधिक शोर होता है कि मानव के चारों ओर अशांति का साम्राज्य हो जाता है तेज ध्वनि अत्यधिक कष्ट प्रतीत होती है दीपावली एवं विवाह उत्सव में होने वाली आतिशबाजी के शोर से भी ध्वनि प्रदूषण उत्पन्न होता है।

कारखानों का शोर

बड़े बड़े उद्योगों एवं कारखानों में उपयोग में लाई जाने वाली बड़ी-बड़ी मशीनों एवं भारी उपकरणों से अत्यधिक अवांछित शोर बढ़ता है। यह शोर प्रदूषण अत्यधिक हानिकारक होता है कई बार औद्योगिक ध्वनि प्रदूषण से वहाँ काम करने वाले श्रमिक के सुनने की क्षमता कम हो जाती है।

वाहनों का शोर

ध्वनि प्रदूषण का एक प्रमुख कारण यातायात के विभिन्न साधनों जैसे बस ,ट्रक ,स्कूटर ,मोटरसाइकिल ,रेलवे एवं अन्य मोटर गाड़ियों है। परिवहन एवं यातायात के साधनों द्वारा उत्पन्न शोर प्रदूषण अधिक व्यापक एवं स्थाई होता है। इसके अलावा वायुयान ,जेट विमान एवं सुपर सोनिक वायुयान द्वारा उत्पन्न शोर से ध्वनि प्रदूषण की समस्या अत्यंत चिंताजनक होती जा रही है।

ध्वनि स्रोत ध्वनि (डेसीबल में)
पत्तियों की सरसराहट 20 डेसिबल
फुसफुसाहट 30 डेसिबल
कमरे / शांत कार्यालय की ध्वनि 40 डेसीबल
सामान्य बातचीत के समय की ध्वनि 60 डेसिबल
ट्रक की आवाज 80-85 डेसिबल
जेट इंजन की आवाज 120 डेसिबल
जेट प्लेन का उतरना 150 डेसिबल
रॉकेट इंजन 180 डेसिबल

 

निष्कर्ष

तीव्र गति की ध्वनि हमारे जीवन को प्रभावित करती है इसे रोका न गया तो इससे काफी गंभीर परिणाम हो सकते हैं ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए हम सभी को आगे आना होगा।

FAQ

1. ध्वनि की गति से तेज चलने वाले जेट विमानों से उत्पन्न चोर को क्या कहते हैं ?

Ans – सोनिक बूम

2. ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने वाले हरे पौधे क्या कहलाते हैं ?

Ans -ग्रीन मफलर

3. ध्वनि मापने की इकाई क्या है ?

Ans – डेसीबल (DB)

 

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