जल ही जीवन है पर निबंध | Jal Hi Jivan Hai Par Nibandh

जल ही जीवन है पर निबंध | Jal Hi Jivan Hai Par Nibandh- नमस्कार दोस्तों आज के इस लेख में हम आपसे बात करने वाले है। Jal Hi Jivan Hai Par Nibandh   यह टॉपिक कई बार परीक्षाओ में पूछा जा चूका है।  यदि आप class 8,9 ,10 ,11 ,12 के छात्र है।  तो आपको इस लेख को जरूर पढ़ना चाहिये।

प्रस्तावना

पृथ्वी पर जल प्रकृति के अनमोल उपहारों में से एक है। मनुष्य के शरीर में लगभग दो तिहाई भाग पानी का होता है जिससे यह साबित हो जाता है कि जल का हमारे जीवन में कितना महत्व है। धरती पर रहने वाले हर प्राणी को पानी की जरूरत होती है इसके अलावा पेड़-पौधों को भी जल की जरूरत होती है इसलिए सही कहा गया है ‘जल बिना जीवन नहीं’ । (Jal Hi Jivan Hai Par Nibandh) 

जल आमतौर पर समुद्र, झीलों, तालाब, कुए और नहरों आदि में मिलता है। समुद्र में पाया जाने वाला जल हमारे पीने लायक नहीं होता क्योंकि यह पानी ज्यादातर खारा होता है इसे पीने लायक बनाना बहुत कठिन कार्य माना जाता है।

वैज्ञानिक समुद्र के जल को बनाने के लिए रोजाना नए प्रयोग कर रहे हैं। हमारा जीवन पानी पर ही टिका हुआ है पानी हमारे जीवन के लिए कितना जरूरी है। यह धरती पर रहने वाला हर प्राणी जानता और समझता है किंतु यह जानते हुए भी कि हमारे लिए पानी की कीमत क्या है। हम इसे रोजाना ऐसे ही बर्बाद होने देते हैं (Jal Hi Jivan Hai Par Nibandh) जितने जल की जरूरत होती है हम उससे कहीं ज्यादा जल ऐसे ही बर्बाद कर देते हैं।

इसके अलावा निरंतर हो रहा जल प्रदूषण हमारे लिए समस्या खड़ी कर रहा है देश के कुछ भाग तो ऐसे हैं जहां पीने लायक शुद्ध पानी मिल पाना बहुत कठिन कार्य हो गया है। अगर मिलता भी है तो ऐसे में उन्हें मीलों दूर जाकर पानी मिलता है जिससे उनका आधा दिन तो पानी लाने में निकल जाता है दूसरी तरफ बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण पानी की खपत दिनोंदिन बढ़ रही है जिस कारण लोगों को पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

सृष्टि की रचना क्षितिज, जल, पावक, गगन, और वायु इन पांच तत्वों से हुई है। पृथ्वी पर पाए जाने वाले समस्त प्राणियों एवं पौधों के जीवन का आधार जल ही है उसके बिना जीवन संभव नहीं है अतः ऐसी मूल्यवान वस्तु का संरक्षण करना सबके लिए जरूरी है।

संपूर्ण पृथ्वी पर जल का प्रतिशत 71% है जल के बिना मानव जीवन की कल्पना करना रात में तारे देखने के बराबर है।

जल का महत्व

पृथ्वी के जीव-जंतुओं ,पशु-पक्षियों ,फसलों ,वनस्पतियों पेड़-पौधों आदि सभी के लिए जल अनिवार्य है। बिना जल के इन सभी का रह पाना संभव नहीं है। जल से संसार में जीवन है चारों ओर फैली हरियाली, फसलें ,फल-फूल आदि सभी जल के कारण ही जीवित है मानव जल के बिना जीवित रह ही नहीं सकता ।

  • जल के बिना पृथ्वी पर कोई भी मनुष्य जीव जंतु जीवित नहीं रह सकता।
  • फसलों के उत्पादन और कृषि के लिए जल का इस्तेमाल किया जाता है।
  • जल पीने से पाचन ,शरीर का तापमान ,परिसंचरण और अन्य गतिविधियां बेहतर होती है।
  • पौधे अपना भोजन बनाने के लिए जल का उपयोग करते हैं।
  • पानी का उपयोग सिर्फ पीने के लिए ही नहीं बल्कि कपड़े साफ करने के लिए, घर की सफाई के लिए, बर्तन धोने के लिए, खाना पकाने के लिए भी किया जाता है।
  • जल से बिजली तैयार की जाती है जो मनुष्य के लिए काफी उपयोगी है।
  • जल का उपयोग मशीनों को ठंडा रखने के लिए किया जाता है।
  • बिना जल के कोई पौधे विकसित नहीं हो सकते हैं।
  • वर्षा के रूप में जल का बहुत महत्व है वर्षा होने पर सभी पेड़-पौधे हरे हो जाते हैं। और उन्हें नया जीवन प्राप्त होता है।

रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून।
पानी गए न ऊबरे, मोती मानुष चून।

कवि रहीम ने इस दोहे के माध्यम से जल की महत्ता को उजागर करते हुए कहा कि जल के बिना मोती में कांति, मनुष्य में प्रतिष्ठा, तथा चुना में उपयोगिता नहीं रहती सचमुच पृथ्वी पर जल की उपलब्धता के कारण ही प्राणियों का अर्थ और पदार्थों में उपयोगिता का गुण कायम है।

जल ही जीवन है पर निबंध | Jal Hi Jivan Hai Par Nibandh
जल ही जीवन है पर निबंध | Jal Hi Jivan Hai Par Nibandh

 

जल के विभिन्न स्रोत

जल प्राप्त करने के कई स्रोत हैं। सागर में अथाह जल भरा है किंतु वह पानी पीने योग्य नहीं है इसलिए वह हर प्रकार की पूर्ति नहीं कर सकता पानी का मूल स्रोत वर्षा है वर्षा का पानी ही नदियों तालाबों जलाशयों में एकत्रित होकर जल की पूर्ति करता है। इसके अतिरिक्त पहाड़ों पर जमने वाली बर्फ पिघल कर जल के रूप में नदियों में आती है कुआ, नलकूप आदि के द्वारा पृथ्वी के नीचे विद्यमान जल को प्राप्त किया जाता है। इस तरह विभिन्न स्रोतों द्वारा जल की पूर्ति की जाती है।

जल का उपयोग

कृषि कार्य में

कृषि का आधार जल ही है जल के बिना कृषि नहीं की जा सकती है। भारत जैसे कृषि प्रधान देश में जहां कृषि का महत्व इस बात से स्पष्ट हो जाता है कि भारतीय कृषि विश्व की 17.5% जनसंख्या का पालन-पोषण करती है इसलिए भारत में कृषि का विशेष महत्व है। कृषि का आधार चल ही है।

घरेलू कार्यों में

घरों में खाना बनाने, बर्तन साफ करने आदि के लिए जल का उपयोग किया जाता है।

“जल है तो कल है”

उद्योगों में

विभिन्न उद्योगों जैसे सूती वस्त्र उद्योग में जल का उपयोग रेशों को साफ करने के लिए किया जाता है। बिना जलके यह उद्योग स्थापित नहीं हो सकता है इसके अतिरिक्त जल विद्युत प्रणाली उद्योगों को सस्ती जल विद्युत उपलब्ध कराती है।

पेय हेतु-Jal Hi Jivan Hai Par Nibandh

जल का सर्वाधिक उपयोग पेयजल के रूप में होता है। जल के बिना मानव जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती जल के बिना मानव 3 दिन से अधिक जीवित नहीं रह सकता।

जल का अभाव

विगत वर्षों में जल की निरंतर कमी हो रही है वर्षा कम हो रही है। धरती का जल स्तर लगातार गिर रहा है जल की समस्या भारत में ही नहीं संसार भर में हो रही है कुछ स्थानों पर तो जल के लिए त्राहि-त्राहि मची हुई है। क्या आपको पता है संसार का तीसरा विश्व युद्ध जल के लिए होगा।

हम जल का संरक्षण किस प्रकार करेंगे

  • हम जल संरक्षण करने के लिए कुछ प्रयास कर सकते हैं।
  • जरूरत अनुसार जल का उपयोग करें।
  • अगर गिलास में पानी बचा है तो उसे पौधे में डाल दें।
  • वाहन दुकान पर जाकर साफ न कराएं बल्कि एक बाल्टी पानी से ही अपने बहन को साफ करें।
  • जरूरत से ज्यादा पानी का उपयोग न करें।
  • परंपरागत जल संरक्षण की तकनीक अपनाएं और पानी बचाएं।
  • पानी पीने के लिए गिलास उतना ही भरे जितना पानी पीना हो।

जल संरक्षण से खतरा

हमारी पृथ्वी पर अब उपयोग करने लायक जल धीरे-धीरे समाप्त होता जा रहा है। और इसका बड़ा कारण भी हम मनुष्य ही है अगर इसी तरह से हम प्रकृति का नाश करते रहे तो वह दिन दूर नहीं जब तीसरा विश्वयुद्ध जल पर ही होगा।

हम कुछ दिन भोजन के बिना रह सकते हैं लेकिन जल के बिना एक भी दिन नहीं रह सकते क्योंकि मनुष्य के शरीर का 70% हिस्सा जल से बना हुआ होता है।

जल समस्या का समाधान

जल की कमी को देखते हुए यह आवश्यक है कि यह समस्या भयंकर रूप धारण करें। (Jal Hi Jivan Hai Par Nibandh) उससे पहले ही हमें जल संरक्षण के बारे में सोचना होगा जल का पूरी तरह से सदुपयोग करना होगा। वर्षा के समय जो पानी नालों व नदियों के द्वारा बहकर समुद्र में पहुंच जाता है उसे इकट्ठा करने का प्रयास करना होगा वर्षा काल में पानी को पृथ्वी में नीचे पहुंचाया जाए तो जल स्तर ऊपर आएगा। इसलिए इस समस्या के प्रति जागरूक रहना आवश्यक है ।

भारत के किन राज्यों में जल का उपयोग सबसे अधिक होता है

भारत के जिन राज्यों में धान की खेती की जाती है जैसे पंजाब ,हरियाणा और पश्चिम बंगाल वहां पर भूजल का बहुत अधिक उपयोग होता है। क्योंकि धान की खेती के लिए पानी की बहुत मात्रा में आवश्यकता होती है।

भारत के कुछ राज्य ऐसे हैं जो भूजल क्षमता का बहुत कम उपयोग करते हैं जैसे छत्तीसगढ़, ओडिशा, केरल और गुजरात उत्तर प्रदेश, त्रिपुरा, बिहार, महाराष्ट्र अपने भूजल संसाधनों का मध्यम उपयोग करते हैं।

विश्व जल दिवस

विश्व जल संरक्षण दिवस 22 मार्च को मनाया जाता है। वर्ष 2021 में इसकी मुख्य थीम थी।” पानी का महत्व “ वर्ष 1992 में रियो डी जेनेरियो मैं आयोजित संयुक्त राष्ट्र की पर्यावरण व विकास की बैठक में स्वच्छ जल हेतु एक अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाने का निर्णय लिया गया।

22 मार्च 1993 को पहला विश्व जल दिवस मनाया गया। (Jal Hi Jivan Hai Par Nibandh)  और वर्ष 2003 से “UN वाटर” नामक एक कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत स्वच्छ जल संसाधनों ,सफाई व जल से संबंधित आपदाओं के मुद्दों पर कार्य किए जाते हैं।

भारत के पहले जल पुरुष

राजेंद्र सिंह को भारत के जल पुरुष के नाम से जाना जाता है। राजेंद्र सिंह ‘तरुण भारत संघ’ नामक गैर सरकारी संगठन के चेयरमैन है। वर्ष 2001 में राजेंद्र सिंह को ‘रेमन मैग्सेसे’ पुरस्कार’ एवं वर्ष 2015 में ‘स्टॉकहोम वाटर प्राइज’ दिया गया था।

उपसंहार

यदि समय रहते जल संरक्षण की ओर ध्यान न दिया गया तो संसार का विनाश हो जाएगा (Jal Hi Jivan Hai Par Nibandh) जल के बिना किसी का भी जीवत रहना संभव नहीं है बिना जल के विनाश अवश्य संभव है।

सत्य यह है की जल ही जीवन है इसलिए जल की पूर्ति आवश्यक है। अतः अब समय आ गया है कि बिना समय गवाये और विलंब किए। मानव को जल के अपव्यय को रोकने के साथ-साथ उसके संरक्षण हेतु प्रभावी उपाय करने चाहिए। तभी हमारी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित हो सकेगा

मनुष्य ने अपने स्वार्थ के लिए प्रकृति का संतुलन बिगाड़ा है और अपने लिए खतरे की स्थिति उत्पन्न कर ली है। अब प्रकृति का श्रेष्ठतम प्राणी होने के नाते उसका यह कर्तव्य बनता है कि वह जल संकट की समस्या के लिए जल संरक्षण पर जोर दें। जल मनुष्य ही नहीं पृथ्वी के हर प्राणी के लिए आवश्यक है इसलिए जल को जीवन की संज्ञा दी गई है।

इस समय जल प्रदूषण एवं जल संकट के लिए मनुष्य ही जिम्मेदार है (Jal Hi Jivan Hai Par Nibandh) इसलिए अपने अस्तित्व की नहीं बल्कि पृथ्वी की रक्षा के लिए भी मनुष्य को जल संकट का समाधान शीघ्र ही करना होगा और उसे इस समस्या के समाधान के लिए जल संरक्षण के महत्व को स्वीकार करना होगा तभी मानव का अस्तित्व बचाया जा सकता है।

आज जरूरत है हमें पानी की एक-एक बूंद को बचाने की जितनी जरूरत हो उसके मुताबिक ही हमें पानी को इस्तेमाल करना चाहिए क्योंकि हम भविष्य में तभी जिंदा रह सकते हैं यदि हम जल का संरक्षण करेंगे। यह आपके लिये हम सलाह नहीं दे रहे चेतावनी दे रहे हैं।

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