जनसंख्या वृद्धि पर निबंध | Jansankhya Vriddhi Par Nibandh | Essay on Population in Hindi

नमस्कार दोस्तों आज के आर्टिकल में हम बात करेंगे Jansankhya Vriddhi Par Nibandh – Essay on Population in Hindi के बारे में बिल्कुल आसान भाषा में जनसंख्या वृद्धि पर निबंध क्लास 5 से 12 की परीक्षाओ में पूछा जाता है।  इस आर्टिकल को पूरा अवश्य पढ़े –

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प्रस्तावना –

भारत की जनसंख्या  विश्व की कुल जनसंख्या का 17.5% है परंतु उसके पास पूरे विश्व की कुल भूमि का 2.42% ही है। इस कारण भारत की भूमि पर जनसंख्या घनत्व अत्यधिक बढ़ गया है। भारत मे साधन और सुविधाएं तो बहुत ही सीमित है लेकिन खाने वाले निरंतर और हर रोज बढ़ते जा रहे हैं.  प्रतिदिन बढ़ने वाली यह भीड़ भारत के लिए चिंता का विषय है अब वह दिन दूर नहीं जब भारत विश्व का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश होगा।

Jansankhya Vriddhi Par Nibandh

भारत में जनसंख्या वृद्धि का मुख्य कारण जन्म दर पर नियंत्रण ना रख पाना है और मृत्यु दर में कमी इसका दूसरा सबसे बड़ा कारण है। भारत ने  पहले भी कई ऐसे कार्यक्रम चलाए हैं जिससे भारत की जनसंख्या जन्म दर में कमी लाई जा सके। लेकिन अभी तक कोई मजबूत कदम नहीं उठाया गया है।

जनसंख्या वृद्धि पर निबंध | Jansankhya Vriddhi Par Nibandh | Essay on Population in Hindi
                                                                         जनसंख्या वृद्धि पर निबंध

जनसंख्या वृद्धि क्या है

किसी भी देश की तेजी से बढ़ती हुई लोगों की संख्या को जनसंख्या व्रद्धि कहा जाता है। आवादी में तीव्र गति से वृद्धि को जनसंख्या विस्फोट कहा जाता है।

Note  – क्या आपको पता है पूरे विश्व में 1 सेकंड में 2 बच्चे पैदा होते हैं। इसका मतलब 1 दिन में लगभग 2 लाख बच्चे पैदा होते हैं। और 1 वर्ष में 7 करोड़ बच्चे पैदा होते हैं। अब आगे ज्यादा सोचने की आवश्यकता नहीं है।

अब हम आगे चार्ट में देखेंगे कि विश्व की आबादी और भारत की आवादी किस तरह से लगातार बढ़ती जा रही है।

विश्व की आवादी

वर्ष (Year) आवादी (Population)
सन 1600 50 करोड़
सन 1800 100 करोड़
सन 1930 200 करोड़
सन 1965 350 करोड़
सन 1975 400 करोड़
सन 1990 500 करोड़
सन 2000 640 करोड़
सन 2011 700 करोड़

एक अनुमान के मुताबिक आगे होने वाली जनगणना में पूरे विश्व की आबादी 900 करोड़ होगी। (Jansankhya Vriddhi Par Nibandh)

जनसंख्या की दृष्टि से चीन के बाद भारत का स्थान आता है भारत में जनसंख्या वृद्धि दर बहुत अधिक है वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या 121 करोड़ से अधिक थी.

भारत की आवादी

वर्ष (Year) आवादी (Population)
1901 23 करोड़ 80 लाख
1911 25 करोड़ 20 लाख
1921 25 करोड़ 10 लाख
1931 27 करोड़ 90 लाख
1941 31 करोड़ 90 लाख
1951 36 करोड़ 10 लाख
1961 43 करोड़ 90 लाख
1971 54 करोड़ 80 लाख
1981 68 करोड़ 40 लाख
1991 84 करोड़ 40 लाख
2001 102 करोड़ 70 लाख
2011 121 करोड़

 

भारत में जनसंख्या वृद्धि के कारण

निरक्षरता

निरक्षर लोग छोटे परिवार के महत्व को नहीं जानते हैं इस कारण से अज्ञानता वश निरंतर संतान पैदा करते रहते हैं। और पता नही पड़ता कब “हम दो से हमारे 10” हो जाते हैं।

कम आयु में शादी-Jansankhya Vriddhi Par Nibandh

आज भी गांव में बाल विवाह की प्रथा प्रचलित है कानूनी प्रतिबंधों के बावजूद गांव व ग्रामीण इलाकों में कम आयु में ही लड़के और लड़कियों के विवाह करा दिए जाते हैं कम आयु में विवाह होने की वजह से दंपत्ति संतान उत्पन्न करने लगते हैं। और भारत की जनसंख्या बढ़ाते हैं।

सामाजिक रीति

आज भी भारत के ग्रामीण व शहरी इलाकों में एक सामाजिक रीति रिवाज बहुत ही ज्यादा “फेमस” है वह रीति रिवाज है कि लोग परिवार में पुत्र का जन्म आवश्यक मानते है। और कहते हैं कि वंश का नाम आगे पुत्र ही बढ़ाता है। और जब तक पुत्र रत्न की प्राप्ति नहीं हो जाती तब तक लोग संताने पैदा करते रहते हैं।

घर की जान होती है बेटियां,
पिता का गुमान होती हैं बेटियां,
ईश्वर का आशीर्वाद होती है बेटियां,
यूं समझ लो की बेमिसाल होती.

 

 

बेटियों की आंखें कभी नाम ना होने देना,
जिंदगी में उनकी खुशियां कम ना होने देना,
बेटियों को हमेशा हौसला देना गम ना होने देना,
बेटा बेटी में फर्क होता है खुद को यह भ्रम ना होने देना.

मृत्यु दर में निरंतर कमी

आधुनिक चिकित्सा सुविधा के फल स्वरुप मृत्यु दर में कमी आई है अकाल ,महामारी ,कुपोषण ,भूखमरी से मृत्यु बहुत ही कम हो रही है क्योंकि चिकित्सा की सुविधाएं बहुत ही अच्छी हो गई है अच्छी स्वास्थ्य सेवाओं के कारण नवजात शिशुओं के मृत्यु दर में भारी कमी देखने को मिलती है।

भारत में सन 1921 में मृत्यु दर 49.2 प्रति हजार थी। 2011 कि जनगणना के अनुसार मृत्यु दर अब घटकर 6.3 व्यक्ति प्रति हजार हो गई है।

गरीबी

हमारे देश की जनता का रहन-सहन निम्न स्तरीय निर्धन है। वह इस बात में विश्वास करते हैं कि जितने अधिक घर में लोग होंगे बे काम करके अधिक मात्रा में पैसे लाएंगे और हमारी गरीबी दूर हो जाएगी यह भी जनसंख्या वृद्धि का सबसे बड़ा कारण है।

जनसंख्या वृद्धि के दुष्परिणाम 

खाद्य सामग्री की समस्या

देश की जनसंख्या में लगातार तीव्र गति से वृद्धि होने के कारण खाद्य पदार्थों की आपूर्ति कम होने लगती है जैसे-जैसे जनसंख्या बढ़ती जाती है खाद्य सामग्री का अभाव आने लगता है और खाद्य सामग्री के अभाव में बच्चों का शारीरिक विकास नहीं हो पाता है।  बच्चे कुपोषण से मरने लगते है। और व्यक्तियों का स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है। और खाद्य आपूर्ति के कारण लगातार महंगाई बढ़ती चली जा रही है।

शिक्षा की समस्या

जनसंख्या में तीव्र वृद्धि के कारण विद्यालयों में काफी बच्चे प्रत्येक वर्ष प्रवेश लेने से वंचित रह जाते हैं इससे बच्चों का शारीरिक तथा मानसिक विकास ठीक ढंग से नहीं हो पाता है और भारत में बहुत सारे बच्चे प्रत्येक वर्ष विद्यालयों में प्रवेश लेने से वंचित रह जाते हैं।

बच्चों को सही ठंग से शिक्षा नहीं मिल पाती है जिससे उनका मानसिक विकास सही ढंग से नहीं हो पाता है यह जनसंख्या वृद्धि की सबसे बड़ी समस्या है।

रोजगार की समस्या

बढ़ती हुई जनसंख्या के साथ रोजगार के साधन उसी गति से नहीं बढ़ पाते हैं इसके कारण बेरोजगारी बहुत तेजी से फैलती जा रही है।

आवास की समस्या

जनसंख्या वृद्धि के कारण भारत के अधिकांश लोग झोपड़ियों में रहते है। लाखों लोग सड़क के किनारे सोकर रात्रि गुजारते हैं। उनके पास रहने के लिए कोई स्थान नहीं होता है।

चिकित्सा व्यवस्था की समस्या

जनसंख्या में तीव्र वृद्धि के कारण अस्पतालों में अधिक भीड़ रहती है जिससे रोगियों की देखभाल ठीक प्रकार से नहीं हो पाती है।

प्रदूषण

जनसंख्या में तीव्र वृद्धि के कारण जल ,वायु ,मृदा मैं प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है। इससे सभी लोग बुरी तरह प्रभावित हो रहे है। जल स्रोतों के प्रदूषित होने के कारण शुद्ध जल उपलब्ध नहीं हो पाता है. जिसके कारण लोगों को गंभीर समस्या का सामना करना पड़ता है।

संक्रामक रोग

जनसंख्या में तीव्र वृद्धि के कारण संक्रामक रोग बढ़ रहे हैं। जैसे अभी हाल ही में पूरे विश्व में फैल रहा कोरोनावायरस

कृषि भूमि का बंटवारा

भारत एक कृषि प्रधान देश है परिवार में कृषि का बंटवारा होने से भूमि छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित हो जाती है ऐसा करने से परिवार की आर्थिक स्थिति खराब हो जाती है।

जनसँख्या नियंत्रण के लाभ (Jansankhya Vriddhi Par Nibandh)

  • सभी मनुष्य सुखी एवं व्यवस्थित रहेंगे।
  • जितना छोटा  परिवार होगा उतना ही सक्षम होगा।
  • सभी को अच्छी शिक्षा मिलेगी।
  • यातायात की समस्या सामने नहीं आएगी।
  • सभी को अच्छा भोजन मिलेगा
  • आवास की समस्याए लगभग ख़त्म हो जाएगी
  • नियमित तरिके से सरकारी योजनाओ का लाभ मिल सकेगा
  • प्राकृतिक संसाधनों का दोहन नहीं होगा।
  • पर्यावरण प्रदूषित नहीं होगा
  • जनसँख्या नियंत्रण से चारो और सुख-समृद्धि और विकास की नदिया बहेगी।

 

जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण

कानून व्यवस्था

भारत में जनसंख्या वृद्धि को रोकने के लिए संविधान में कोई कठोर कानून की व्यवस्था होनी चाहिए सरकार ने विवाह योग्य लड़की की आयु 18 वर्ष तथा लड़के की आयु 21 वर्ष निर्धारित की है। लेकिन इस कानून का सही ढंग से पालन नहीं किया जा रहा है। इस कानून का भी कठोरता से पालन होना चाहिए।

उचित शिक्षा का प्रबंधन

जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित(Jansankhya Vriddhi Par Nibandh)  करने के लिए उचित शिक्षा व्यवस्था अति आवश्यक है शिक्षा के माध्यम से ही परिवार को सीमित रखने की प्रेरणा दी जा सकती है। शिक्षित व्यक्ति अंधविश्वास और रूढ़िवादिता से बाहर निकल आता है इससे जनसंख्या वृद्धि को कंट्रोल करने में मदद मिलेगी।

प्रो. महालनोबिस के अनुसार – शिक्षित परिवारों में प्रायः कम बच्चे होते हैं और शिक्षा की व्यवस्था से जनसंख्या के गुणात्मक लक्षणों में वृद्धि होती है देश के अधिकांश ग्रामीण भागों में उच्च शिक्षा का अभाव है।

सीमित परिवार

भारतवर्ष में लगभग 11 करोड परिवार ऐसे हैं जिनकी वैवाहिक आयु निर्धारित आयु से कम है इन्हें शिक्षित करके परिवार को सीमित रखने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। ” हम दो हमारा एक का फार्मूला सभी पर लागू हो “

परिवार कल्याण संबंधी कार्यक्रमों में रुचि

परिवार को सीमित रखने के लिए सरकार द्वारा ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना चाहिए।(Jansankhya Vriddhi Par Nibandh)  जिससे लोगों को प्रोत्साहन मिल सके और वे परिवार कल्याण संबंधी कार्यक्रमों में रुचि लें।

दो बच्चों वाले परिवार में बच्चों को निशुल्क शिक्षा ,सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज , आवासीय योजनाओं में आरक्षण ,नौकरियों में प्राथमिकता ,स्वयं का व्यवसाय करने हेतु बैंकों से ऋण सुविधा आदि सरकार द्वारा मुहैया कराने चाहिए।

आर्थिक स्तर में सुधार

उचित रोजगार के अवसर उपलब्ध कराकर व्यक्ति के आर्थिक स्तर में सुधार लाया जा सकता है जिस परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होती है वह संतान के दायित्व को अच्छी तरह से निभा नहीं पाते हैं ऐसा व्यक्ति अपने परिवार को सीमित ही रखता है।

परिवार नियोजन की कानूनी अनिवार्यता

जनसंख्या पर प्रभावकारी नियंत्रण करने का उत्तम उपाय यह है कि समस्त देश में बच्चों की संख्या को सीमित कर दिया जाए प्रत्येक परिवार को 2 बच्चों के बाद परिवार नियोजन अपनाने हेतु प्रभावकारी ढंग से समझाया जाए।

 

जनसँख्या वृद्धि को रोकने के लिए किये गए प्रयास 

जनसँख्या वृद्धि (Jansankhya Vriddhi Par Nibandh) को रोकने के लिए हमारे देश की सरकारों ने कई प्रयास किये है।  पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत परिवार नियोजन कार्यक्रम लाया गया। लेकिन यह योजना देश के गावो तक नहीं पहुंच सकी।

  • इस योजना के अंतर्गत केंद्र सर्कार ने 146 और राज्य सरकारों ने 205 परिवार नियोजन केन्द्रो की स्थापना की
  • दूसरी पंचवर्षीय योजना को गाँवो तक पहुंचाया गया।
  • तीसरी पंचवर्षीय योजना में गावो के लोगो को परिवार नियोजन का लाभ समझाया गया।
  • पांचवी पंचवर्षीय योजना में परिवार नियोजन को पुरे देश में लागु कर दिया गया।
  • गांव-गांव में उपचार केंद्र खोले गए लेकिन इन सबके सामने अशिक्षा और अन्धविश्वास सामने आया।

 

उपसंहार 

हमारे देश में जनसँख्या वृद्धि (Jansankhya Vriddhi Par Nibandh) का प्रमुख कारण अशिक्षा और अन्धविश्वास है।  हमें समाज में व्याप्त कुरूतियो  मिटाना होगा।  सरकारों को निरंतर प्रयास  होगे। जागरूकता फैलानी होगी।  अधिक जनसंख्या के दुष्प्रभावों को समझना होगा।

जनसंख्या वृद्धि पर कोटेशन

 

बच्चो को ईश्वर का उपहार मत बताओ,

अन्धविश्वास से आवादी मत बढ़ाओ “

FAQ 

1 विश्व जनसख्याँ दिवस कब मनाया जाता है ?

ANS – प्रत्येक वर्ष 11 जुलाई को विश्व जनसँख्या दिवस मनाया जाता है।

 

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