महात्मा गांधी पर निबंध,Mahatma Gandhi Biography In Hindi | 2021-2022

महात्मा गांधी पर निबंध,Mahatma Gandhi Biography In Hindi

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महात्मा गांधी का सम्पूर्ण जीवन परिचय

महात्मा गांधी ( मोहनदास करमचंद गांधी ) का जन्म 2 अक्टूबर सन 1869 ईस्वी को गुजरात राज्य के काठियावाड़ जिला अंतर्गत पोरबंदर में हुआ था। उनकी माता श्री पुतलीबाई और पिता श्री करमचंद गांधी जी थे। महात्मा गांधी के बचपन का नाम मोहनदास था उनके पिता राजकोट रियासत के दीवान थे राजकोट में ही रहकर गांधीजी ने हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण की थी महात्मा गांधी पर बालक मन में ही माता के हिंदू आदर्श की छाप और पिताश्री के सिद्धांत वादी विचारों की गंभीर छाप पर चुकी थी।जल ही जीवन है पर निबंध इसे अवश्य पड़े।

इसलिए उच्च शिक्षा को प्राप्त करने के लिए जब गांधीजी इंग्लैंड जाने लगे तब माता श्री को उन्हीने यह विश्वास दिलाया था। कि वह मांस और शराब को स्पर्श नहीं करेंगे और हुआ भी यही। (Mahatma Gandhi Biography In Hindi) गांधीजी इंग्लैंड में लगभग 3 वर्षों तक रहे और वकालत की शिक्षा पूरी की वेरिस्टरी की शिक्षा प्राप्त करके गांधीजी पुनः स्वदेश लौट आए।

“सीधा-साधा वेश था, ना कोई अभिमान
खादी की एक धोती पहने बापू की थी शान”

प्रदेश आकर गांधी जी ने मुंबई में वकालत शुरु कर दी एक मुकदमे की पैरवी करने के लिए गांधी जी को दक्षिण अफ्रीका जाना पड़ा। मार्ग में गांधी जी के साथ अंग्रेजों ने दुर्व्यवहार किया। दक्षिण अफ्रीका में गांधी जी ने भारतीयों के प्रति गोरे शासकों की अमानवता और हृदय हीनता देखी। इस घटना को देखकर गांधी जी का मन क्षुब्ध हो उठा। ग़ांधी जी अंग्रेजो के इस अनुच्छेद और हृदय पर चोट पहुंचाने वाले व्यवहार से क्रोधित हो गए थे।

सन 1906 मैं जब ट्रांसवाल कानून पारित हुआ। तब गांधीजी ने इसका विरोध किया। इसके लिए गांधी जी ने सत्याग्रह आंदोलन को जारी किया। और अनेक पीड़ित तथा शोषित भारतीयों को इससे प्रभावित करते हुए उनकी स्वतंत्रता की चेतना को जगाया। इसी सिलसिले में गांधी जी ने कांग्रेस की स्थापना भी की लगातार 2 वर्षों की सफलता के बाद गांधी जी भारत लौट आए।

Mahatma Gandhi Biography In Hindi
महात्मा गांधी पर निबंध

सन 1915 में जब गांधीजी दक्षिण अफ्रीका से स्वदेश लौट आए तो यहां भी उन्होंने अंग्रेजों के अत्याचारों और कठोरता का गहरा अध्ययन करके भारतीयों की स्वतंत्रता के प्रयास आरंभ कर दिए गांधीजी ने भारत की समस्त जनता को स्वतंत्रता के लिए आह्वान किया अबे अंग्रेज सरकार से टक्कर लेने के लिये पूर्ण रूप से तैयार हो गए थे।

सन 1918 में अंग्रेज सरकार को अपनी नीतियों में सुधार करना पड़ा। लेकिन गांधीजी इससे संतुष्ट नहीं थे।गांधी जी ने सन 1919 में असहयोग आंदोलन का नेतृत्व करते हुए देशव्यापी स्तर पर स्वतंत्रता प्राप्ति का बिगुल बजा दिया। फल स्वरुप गांधी जी ने भारत की स्वतंत्रता के लिए जी जान से मेहनत की। (Mahatma Gandhi Biography In Hindi) इस समय देश के हर एक कोने से एक से बढ़कर एक देश भक्तों ने भारत को गुलामी से आजाद करने के लिए कमर कस ली और महात्मा गांधी का साथ देना शुरू कर दिया था।

इसमें बाल गंगाधर तिलक, गोपाल कृष्ण गोखले, लाला लाजपत राय, सुभाष चंद्र बोस आदि मुख्य रूप से थे इसी समय सन 1929 ईस्वी में अंग्रेजों से पूर्ण स्वतंत्रता की मांग की गई कोई प्रभाव न पड़ने के कारण महान नेताओं सहित महात्मा गांधी ने नमक कानून तोड़ डाला। महात्मा गांधी सहित अनेक व्यक्तियों को जेल जाना पड़ा। इससे कुछ सहमे हुए अंग्रेजो ने सत्ता का समझौता किया।

सन 1931 ईस्वी में वायसराय ने लंदन में गोलमेज सम्मेलन का आयोजन किया और इस सम्मेलन में कांग्रेस से बातचीत की गई लेकिन इस बातचीत का कोई परिणाम नहीं निकला।

सन 1934 ईस्वी में अंग्रेजों ने अपनी मूल नीतियों में कुछ सुधार किया। और इसकी घोषणा भी की फिर भी अंग्रेजों का जुल्म भारतीयों पर वैसे ही चलता रहा। इससे दुखी होकर महात्मा गांधी ने सन 1942 ईस्वी में भारत छोड़ो आंदोलन का अभूतपूर्व नारा दिया। चारों ओर से आजादी का स्वर फूट पड़ा समस्त वातावरण केवल आजादी की ध्वनि करता था। अंग्रेज सरकार के पांव उखड़ने लगे अनेक महान नेताओं सहित सभी कर्मठ और देश की आन पर मिटने वाले राष्ट्र भक्तों से जेल भर गई। इतनी भारी संख्या में कभी कोई आंदोलन नहीं हुआ।

महात्मा गांधी की दक्षिण अफ्रीका यात्रा

महात्मा गांधी जी सन 1893 में 1 साल बकालत करने के लिए दक्षिण अफ्रीका चले गए एक दिन वह ट्रेन में सफर जा रहे थे। तब उन्हें तीसरी श्रेणी के डिब्बे में जाने के लिए मजबूर किया गया और उनके इंकार करने पर उन्हें ट्रेन से बाहर फेंक दिया गया।

दक्षिण अफ्रीका में कई होटलों को महात्मा गांधी के लिए वर्जित कर दिया गया था। दक्षिण अफ्रीका में वहां के न्यायाधीश ने महात्मा गांधी को अपनी पगड़ी उतारने का आदेश दिया था। जिसे महात्मा गांधी ने नहीं माना इन सारी घटनाओं ने गांधीजी के जीवन को काफी ज्यादा प्रभावित किया।

और दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों पर हो रहे अन्याय को देखते हुए उन्होंने अंग्रेजी साम्राज्य के अंतर्गत अपने देशवासियों के सम्मान तथा देश में स्वयं अपनी स्थिति के लिए प्रश्न उठाये।

“व्यक्ति की पहचान उसके कपड़ों से नहीं     उसके चरित्र से होती है”

महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत कब लौटे

गांधीजी दक्षिण अफ्रीका 20 वर्षों तक रहे और साल 1915 में वह भारत लौट आए थे उन्हें गोपाल कृष्ण गोखले द्वारा आमंत्रित किया गया था जो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में वरिष्ठ नेता थे उनके भारत लौटने के बाद गोखले ने भारत में मौजूद राजनीतिक स्थिति और सामाजिक मुद्दों के बारे में अवगत कराया था।

भारत आजाद कब हुआ

200 सालो तक अंग्रेजों का गुलाम रहने के बाद 15 अगस्त 1947 को भारत को आजादी मिली। भारत के बारे में यह भी कहा जाता है। कि ब्रिटेन भारत को 1947 में नही 1948 में आजाद करना चाहता था। लेकिन महात्मा ग़ांधी के भारत छोड़ो आंदोलन से परेशान होकर अंग्रेजो ने भारत को 1947 में ही आजाद कर दिया।

भारत ने आजादी को जंग 1930 से ही शुरू कर दी थी। वह रात की 14 अगस्त 1947 की रात आजादी की रात श्याम से ही दिल्ली में जोरदार बारिश हो रही थी लेकिन दिल्ली के रायसीना हिल पर बारिश की परवाह किए बिना लगभग 500000 से ज्यादा लोग मौजूद थे और आजादी के दीवाने टस से मस नहीं हो रहे थे।

रात 9:00 बजे सरदार वल्लभभाई पटेल पंडित जवाहरलाल नेहरू डॉ राजेंद्र प्रसाद लॉर्ड माउंटबेटन वायसराय हाउस पहुंचे तब 14 अगस्त 1947 की रात को 12:00 बजने में कुछ पल बचे थे इसी बीच पंडित नेहरू ने अपनी बात रखते हुए कहा हमने नियति को मिलने का एक वचन दिया था। और अब समय आ गया है कि हम अपने वचन को निभाने पूरी तरह ना सही लेकिन बहुत हद तक आज रात 12:00 जब सारी दुनिया सो रही होगी भारत जीवन और स्वतंत्रता की नई सुबह के साथ उठेगा।

एक ऐसा छोटे इतिहास में बहुत ही कम आता है जब हम पुराने को छोड़ने की तरफ जाते हैं जब एक युग का अंत होता है और जब सालों से शोषित एक देश की आत्मा अपनी बात कह सकती है यह एक संयोग है कि इस पवित्र मौके पर हम समर्पण के साथ खुद को भारत और उसकी जनता की सेवा और उससे भी बढ़कर सारी मानवता की सेवा करने के लिए प्रतिज्ञा ले रहे हैं।

लेकिन इस आजादी के साथ-साथ भारत को उतना ही कम भी था क्योंकि आजादी के कुछ समय बाद भारत दो भागों में बांट चुका था और एक नए देश पाकिस्तान ने जन्म लिया इसके साथ ही भारत अपने 3,46737 किलोमीटर का विस्तार और करीब 8 करोड़ 15 लाख लोग एक ही रात में कवर दिए थे।

महात्मा गांधी के भारत छोड़ो आंदोलन ने अंग्रेजों को अंदर तक हिला दिया था तो दूसरी तरफ सुभाष चंद्र बोस की सेना आजाद हिंद फौज अंग्रेजों के दांत खट्टे कर रही थी ऊपर से दूसरे विश्व युद्ध के बाद ब्रिटिश सरकार खोखली हो गई थी और हर जगह विरोध होने से ब्रिटिश सरकार अंदर से टूट चुकी थी। अंग्रेजों को अब लगने लगा था कि वह भारत प्रशासन करने के लायक नहीं है।

इसलिए ब्रिटिश सरकार ने भारत का अगला वायसराय लेटेस्ट लॉर्ड माउंटबेटन को बनाकर भेजा जिससे कि वह जल्दी से जल्दी भारत को आजाद करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकें अंग्रेजों ने शुरुआत में 3 जून 1948 को भारत को आजाद करने का निर्णय लिया लेकिन इसी बीच एक समस्या आ चुकी थी और वह समस्या थी मोहम्मद अली जिन्ना जिन्ना की मांग थी कि हम भारत के साथ नहीं रह सकते इसलिए भारत के हिस्से को काट कर एक नया देश पाकिस्तान हमें दिया जाए।

जिन्ना की वजह से देश में अलग-अलग जगह हिंसा भड़क उठी देश के बिगड़ते हुए हालातों को देख अंग्रेज और ज्यादा डर चुके थे और सोचने लगे कि हम भारत को कब छोड़ दें लेकिन समस्या यह थी कि अंग्रेजों को भारत को एक नहीं दो टुकड़ों मैं अलग करना था।

अंग्रेजों ने भारत आजाद करने के लिये 15 अगस्त का दिन ही क्यों चुना

भारतीय लोग शुभ और अशुभ को मानते हैं लेकिन इसके साथ ही साथ अंग्रेज भी शुभ और अशुभ को मानते हैं लॉर्ड माउंटबेटन की माने तो 15 अंक उनके लिए शुभ था क्योंकि 15 अगस्त 1945 को जापान ने ब्रिटेन समेत मित्र सेना के सामने आत्मसमर्पण किया था। इसलिए लॉर्ड माउंटबेटन मानते थे कि 15 अगस्त का दिन मित्र देशों के लिए शुभ है।

भारत देश के तिरंगे को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने रात 12:00 बजे सेंट्रल पार्ल्यामेंट में लहराया था। और दूसरी बार सुबह 8:30 पर देश की जनता के सामने फहराया गया।

भारत आजाद होने के बाद 1500 ब्रिटिश सैनिकों की पहली टीम 17 अगस्त 1947 को रवाना हुई। और आखरी टीम 27 अगस्त 1948 को रवाना हुई।

स्वतंत्रता के बाद भारत चंद समय तक स्वस्थ रहा फिर समय के कुछ देर के बाद इसमें सांप्रदायिकता का ऐसा रोग लग गया. (Mahatma Gandhi Biography In Hindi)   कि इसकी संत चिकित्सा करने पर भारत और पाकिस्तान दो विभिन्न अंग सामने आ गए महात्मा गांधी का अंतः करण रो उठा। वह अब यथाशीघ्र मृत्यु की गोद में जाना चाहते थे महात्मा गांधी जी की इस छटपटाहट को समय ने स्वीकार कर लिया ।

महात्मा गांधी द्वारा किए गए आंदोलन की लिस्ट

चंपारण सत्याग्रह 1917
खेड़ा सत्याग्रह 1917
अहमदाबाद मेल मजदूरों का आंदोलन 1918
खिलाफत आंदोलन 1920
असहयोग आंदोलन 1920
सविनय अवज्ञा आंदोलन 1930
भारत छोड़ो आंदोलन 1942

 

महात्मा गांधी का सामाजिक व सांस्कृतिक विचार

गांधीजी आधुनिक भारत के महान व्यवहारिक राजनीतिक व सच्चे कर्मयोगी थे। जिन्होंने सत्य व अहिंसा से युक्त नैतिकता आधारित राजनीति का मार्ग दिखाया। (Mahatma Gandhi Biography In Hindi) जो गांधी जी की विश्व को एक क्रांतिकारी व मौलिक देन है। इसके साथ ही गांधी जी ने संपूर्ण भारत में व्याप्त सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने का लक्ष्य रखा उन्होंने एक ऐसे भारत का निर्माण करने का प्रयास किया। जिसमें सामाजिक समता हो।

महात्मा गांधी का सामाजिक सांस्कृतिक जीवन

उनका सामाजिक और सांस्कृतिक दर्शन दुनिया के कल्याण के लिए महज एक विचार मात्र नहीं था बल्कि उनका संपूर्ण व्यक्तित्व ही मानवीय सरोकार से युक्त था।गांधीजी का सत्य प्रयास विश्व मानवता के लिए था जहां किसी जाति वर्ग के प्रति घृणा का स्थान नहीं है सभी के लिए सत्य प्रेम करुणा ही आदर्श है गांधी जी ने आजादी की लड़ाई के साथ-साथ सामाजिक क्षमता हेतु विभिन्न रचनात्मक कार्यक्रम भी चलाएं

अस्पृश्यता उन्मूलन

गांधी जी को दक्षिण अफ्रीका में गौरव के रंग भेद व नस्ल भेद की नीति को झेलना पड़ा था। 1915 में भारत वापसी के उपरांत गांधी जी ने अस्पृश्यता निवारण को आजादी की लड़ाई के साथ जोड़कर छुआछूत मिटाने का कार्य प्रारंभ किया। इसके लिए उन्होंने 1932 में हरिजन सेवक संघ की स्थापना की और गांधीजी ने इन अछूतों को हरिजन का नाम दिया। जिन्हें भी भगवान की संतान मानते थे।

देश के अधिकतर नेताओं को इस संघ से जोड़ा गया तथा इसके अध्यक्ष घनश्याम दास बिरला को बनाया गया। पंडित गोविंद बल्लभ पंत, सी राजगोपालाचारी, राजेंद्र प्रसाद, जगजीवन राम इत्यादि नेता अस्पृश्यता निवारण के सहयोगी बने।

गांधी जी द्वारा चलाए गए अस्पृश्यता निवारण और सामाजिक संस्था की स्थापना के कार्य के पीछे एक अनोखा दर्शन है। गांधी जी कहा करते थे कि जिनके पुरखों ने अस्पृश्यता चलाने का पाप किया है। उन्हीं को प्रायश्चित के रूप में अस्पृश्यता निवारण के लिये कार्य करना चाहिए। और अछूत माने जाने वाले भाई बहनों की सेवा करो है समानता की भूमिका पर लाना चाहिए।

हरिजन शिक्षा

गांधी जी ने इस समाज के बालक बालिकाओं की शिक्षा हेतु छात्राओं तथा विद्यालय खोले समाज में चंदा मांग कर गांधीजी के सेवक इस काम को करते थे।

भंगी मुक्ति कार्यक्रम

गांधीजी इस कार्यक्रम को बहुत अधिक महत्व देते थे सफाई कर्मचारियों के बच्चों की पढ़ाई उन्हें वैकल्पिक रोजगार उपलब्ध कराना आदि कार्य हरिजन सेवक संघ द्वारा चलाए गए।

स्वच्छता

गांधीजी स्वच्छता के बहुत बड़े पक्षधर थे गांधी जी कहते थे। कि व्यक्ति को अपना टॉयलेट अपने बेडरूम से स्वच्छ रखना चाहिए। गांधीजी का मानना था कि साफ-सफाई ईश्वर भक्ति के बराबर है। और इसलिए उन्होंने लोगों को स्वच्छता बनाए रखने के लिए कहा और शिक्षा दी।

महिला उत्थान (Mahatma Gandhi Biography In Hindi)

गांधीजी का मानना था कि महिलाओं के उत्थान के बिना भारतीय समाज का उत्थान संभव नहीं है। इसलिए गांधीजी ने महिला सशक्तिकरण,महिला सशक्तिकरण, महिला शिक्षा तथा महिला समानता पर बल दिया गांधी जी ने महिलाओं को बच्चों की प्राथमिक पाठशाला के रूप में देखा।

ग्रामोदय अभियान

गांधी जी का कथन था भारत गांव का देश है और इसकी आत्मा गांवों में बसती है। उनका मानना था कि गांव के विकास के बिना भारत की समृद्धि की बात करना सिर्फ कोरी कल्पना होगी। इसलिए गांव के विकास के लिए गांधीजी कुटीर उद्योगों का समर्थन करते थे। (Mahatma Gandhi Biography In Hindi)

शिक्षा द्वारा चरित्र निर्माण

गांधी नैतिक शिक्षा पर बल देते थे। उनका मानना था कि नैतिक शिक्षा द्वारा ही नैतिक समाज का निर्माण किया जा सकता है। गांधीजी शिक्षा को चारित्रिक विकास का आधार मानते थे। उनके अनुसार शिक्षा का उद्देश्य स्वावलंबन या आत्मनिर्भरता है।

धार्मिक सहिष्णुता

गांधी जी मानव कल्याण आश्रम को ही धर्म मानते थे। अक्सर वे कहां करते थे। “मेरा धर्म सत्य और अहिंसा पर आधारित है” सत्य मेरा भगवान है. और अहिंसा उसे साकार करने का साधन है। मैं उसे धार्मिक कहता हूं जो दूसरों का दर्द समझता है। गांधी जी ने धार्मिक मतभेदों वह धार्मिक कट्टरपंथ के विरुद्ध भी संघर्ष किया। (Mahatma Gandhi Biography In Hindi) उन्होंने कहा कि राज्य को धर्म के विषय में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए गांधी जी ने विद्यालयों में धर्म की शिक्षा का भी बहिष्कार किया उन्होंने धर्मनिरपेक्ष वाद के सिद्धांत को सामाजिक न्याय व समानता के साथ जोड़ा उनका कहना था कि भारत प्रमुख धर्मों का आश्रय स्थल रहा है और समय के साथ-साथ बहुत धार्मिक रूप में उभरा है। हमारा व्यापक दृष्टिकोण व सहिष्णुता ही सामाजिक धार्मिक मतभेद सांप्रदायिक तनाव को मिटा सकती है।

 

महात्मा गांधी की मृत्यु

पुणे का शनिवार इलाका ये वह जगह है। जहां पर हिंदू राष्ट्र प्रेम और अग्रणी पत्रिका के दफ्तर हुआ करते थे । और इसी जगह से महात्मा गांधी को मारने की प्लानिंग शुरू हुई थी।

बिरला हाउस में गांधीजी प्रतिदिन शाम 5:00 बजे प्रार्थना करते थे । और इसी जगह नाथूराम गोडसे ने गांधीजी पर लगातार तीन फायर किए। और 30 जनवरी 1948 को नाथूराम विनायक गोडसे ने महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी थी।

गांधी जी की कुछ अन्य रोचक बातें

  • 1930 में जब गांधीजी इंग्लैंड थे तब वहां उन्होंने पहली बार रेडियो पर अमेरिका के लिए भाषण दिया था।
  • गांधी जी की पूरी लाइफ में ब्रिटेन  के प्राइम मिनिस्टर विंस्टन चर्चिल उनके सबसे बड़े क्रिटिकल थे विंस्टन चर्चिल ने गांधी जी को एक बार अधनंगा फकीर कहा दिया था।
  • स्टीव जॉब्स गांधी जी से बहुत प्यार करते थे वह गांधी जी को ट्रिब्यूट देने के लिए उन्हें के जैसा गोल फ्रेम वाला चश्मा पहनते थे। (Mahatma Gandhi Biography In Hindi)
  • गांधी जी बचपन में बेहद शर्मीले लड़के थे वह स्कूल से छुट्टी होते ही घर भाग जाया करते थे ताकि रास्ते में उनसे कोई बात ना करें और कोई उनका मजाक न उड़ाए
  • गांधीजी का निकनेम मोनिया था उनके माता-पिता और दोस्त उनको इसी नाम से बुलाते थे।
  • जब गांधी जी महज 13 साल के थे तब कस्तूरबा गांधी से उनकी शादी कर दी गई जिनकी उम्र महज 14 साल थी।
  • गांधीजी प्रतिदिन 18 किलोमीटर पैदल चलते थे और 1914 से 1948 तक अपने कैंपेन के दौरान ऐसा माना जाता है कि वे अपने जीवन में 79000 किलोमीटर पैदल चले। यह पूरी दुनिया का दो बार चक्कर लगाना है।

महात्मा गांधीजी

  • गांधीजी की हैंडराइटिंग बहुत ही खराब थी। वह बच्चों को लेटर लिखते थे उसमें सिर्फ एक ही बात लास्ट में लिखते थे। अपनी राइटिंग सुधारो किसी व्यक्ति ने गांधी जी से कहा कि आपकी हेड राइटिंग तो खराब है फिर भी आप बच्चों को हेड राइटिंग सुधारने की सलाह क्यों देते हो। इस पर गांधी जी ने कहा कि मैं उनसे इसलिए कहता हूं ताकि उन्हें बाद में मेरी तरह पछतावा ना हो।

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  • गांधीजी बताते हैं कि मेरी लाइफ का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट वह था। जब मैं साउथ अफ्रीका मैं एक ट्रेन में सफर कर रहा था और मेरी स्किन कलर की वजह से मुझे ट्रेन से निकाल दिया गया था।
  • गांधीजी ने अपनी जिंदगी के 2338 दिन जेल में बिताए।
  • 1943 में जब गांधी जी अंग्रेजो के खिलाफ अनशन पर बैठे तब उन्होंने 21 दिन तक उपवास रखा था और कुछ भी नहीं खाया।
  • महात्मा गांधी को शांति का नोबेल पुरस्कार देने के लिए 5 बार नॉमिनेट किया गया (Mahatma Gandhi Biography In Hindi) लेकिन उन्हें यह पुरस्कार नहीं मिला।
  • टाइम्स ऑफ मैगजीन ने 1930 में गांधीजी के डांडी सत्याग्रह के लिए उन्हें पर्सन ऑफ द ईयर घोषित किया था यह सम्मान पाने वाले वह अकेले भारतीय हैं।
  • रविंद्र नाथ टैगोर की भतीजी सरला देवी को महात्मा गांधी ने स्प्रिचल वाइफ कहा था।
  • दूसरे विश्वयुद्ध को रोकने के लिए गांधीजी ने हिटलर को 2 लेटर लिखे थे जिसमें उन्होंने हिटलर को डियर फ्रेंड कहा था गांधी जी ने अपना पहला लेटर दूसरे विश्वयुद्ध से एक महीना पहले 23 जुलाई 1939 को लिखा था। और दूसरा लेटर 24 दिसंबर 1940 को लिखा।

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  • अल्बर्ट आइंस्टीन गांधी जी के बहुत बड़े फैन से वह गांधी जी की अहिंसा के सिद्धांतों को फॉलो करते थे। एक बार अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा की आने वाली नस्लें यह याद रखेंगे के हाड मास चलने वाला ऐसा भी कोई व्यक्ति था।
  • महात्मा गांधी और अल्बर्ट आइंस्टाइन दोनों की एक दूसरे से मिलने की बड़े ख्वाहिश थी 1931 में आइंस्टाइन ने गांधी जी को एक लेटर लिखा जिसमें उन्होंने गांधीजी के कामों की तारीफ की थी। आइंस्टाइन ने लिखा कि आप ने यह साबित कर दिया है की हिंसा के बिना भी सफलता हासिल की जा सकती है।
  • गांधीजी को भारत मे Father Of Nation कहा जाता है। उन्हें यह टाइटल देने वाले व्यक्ति नेताजी सुभाष चंद्र बोस थे. 6 जुलाई 1944 को सिंगापुर se आजाद हिंद रेडियो पर ब्रॉडकास्ट की गई एक स्पीच में नेता जी ने पहली बार गांधी जी को पहली बार फादर ऑफ नेशन कह कर संबोधित किया। (Mahatma Gandhi Biography In Hindi)
  • रविंद्र नाथ टैगोर ने गांधी जी को महात्मा की उपाधि दी थी।
  • गांधीजी की निशानियां आज भी Gandhi Memorial Museum , Madurai मैं रखी गई है।
  • नवंबर 2013 में गांधीजी का चरखा ब्रिटेन में नीलामी के दौरान 1,10000 पाउंड में बेचा था।
  • 2 अक्टूबर को गांधी जी के जन्म दिवस के मौके पर स्वच्छता अभियान के रूप में मनाया जाता है।
  • 15 जून 2007 को यूनाइटेड नेशन जनरल असेंबली ने इस बात की घोषणा की थी कि 2 अक्टूबर को गांधी जी का जन्मदिन हर साल International Day Of Non-Violence के रूप में मनाया जाएगा.
  • गांधीजी की शव यात्रा 8 किलोमीटर लंबी थी बिरला हाउस से राजघाट पहुंचने में 5 घंटे लगे थे उनकी सब यात्रा में 10 लाख लोग साथ चल रहे थे और करीब 10 से 15 लाख लोग शव यात्रा को देखने के लिए रास्ते में खड़े थे।

निष्कर्ष

गांधीजी एक प्रमुख राजनीतिक, दार्शनिक, सांस्कृतिक एवं समाज सुधारक होने के साथ-साथ मानवता के सच्चे पुजारी थे। (Mahatma Gandhi Biography In Hindi) जिनका उद्देश्य था एक ऐसे राम राज्य की स्थापना जहां सर्वोदय समाज का कल्याण हो। जहां धन, अस्पृश्यता, घृणा, शोषण का नहीं बल्कि प्रेम व सहयोग की भावनाएं हो। लेकिन वर्तमान में भी घृणा, जातिभेद, अस्पृश्यता जैसी कुरीतियां विद्यमान है। जब-जब मानवता का हनन होगा तब तक गांधीजी के सामाजिक सांस्कृतिक विचारों की हमें जरूरत होगी।

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