psychology objective questions and answers pdf in hindi 2021

psychology objective questions and answers pdf in hindi

Hello दोस्तों आज हम आपके लिये psychology के महत्वपूर्ण MCQ psychology objective questions and answers pdf in hindi शेयर कर है।  जो भी छात्र इस विषय से सम्बंधित परीक्षा की तैयारी कर रहे है. उनके लिये यह पोस्ट बहुत ही लाभकारी होगी।  यह पोस्ट  आने वाली परीक्षाओ की दर्ष्टि  से बहुत  महत्वपूर्ण है। इस पोस्ट के लास्ट में हम आपको PDF दे रहे है।  पहले आप इस पोस्ट को पूरा पढ़िये उसके बाद पीडीऍफ़ को DOWNLOAD करके रिवीजन कीजिये।यहाँ हमने जो भी प्रश्न शेयर किये है वो परीक्षा की द्रष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण है।

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  • “School Of Infancy” की स्थापना 17 वी शताब्दी में कॉमेनियस ने की थी।
  • बालक विकास का सर्व प्रथम वैज्ञानिक विवरण 18 वीं शताब्दी में पेस्तालाजी द्वारा किया गया था।
  • “Infant Child Development” पुस्तक के लेखक टेन है, यह पुस्तक 1869 ईस्वी में प्रकाशित हुई।
  • “The Mind Of The Child” पुस्तक के लेखक प्रेयर हैं, यह पुस्तक 1881 में प्रकाशित हुई थी।
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  • “Biographical Sketch Of An Infant’ पुस्तक के लेखक डार्विन है यह पुस्तक सन 1877 में प्रकाशित हुई थी।
  • अमेरिका में बाल अध्ययन आंदोलन की शुरुआत 19वीं शताब्दी में हुई थी इस आंदोलन के जन्मदाता स्टैनले हॉल थे।
  • बाल अध्ययन का पितामह स्टैनले हॉल को कहा जाता है।
  • “Pedagogical Seminary” नामक पत्रिका का प्रकाशन हॉल ने करवाया था।
  • बाल विकास में हम बालक के जन्म से लेकर परिपक्व अवस्था तक का अध्ययन करते हैं।
  • बालक का शारीरिक तथा मानसिक विकास किशोरावस्था (18 वर्ष) तक ही होता है।
  • वर्क के अनुसार – बाल विकास मनोविज्ञान की वह शाखा है, जिसमें हम व्यक्ति के जन्म पूर्व अवस्था से परिपक्व अवस्था तक उसके अंदर होने वाले परिवर्तनों का अध्ययन करते हैं।
  • क्रो एंड क्रो के अनुसार – बाल मनोविज्ञान में हम बालक का अध्ययन गर्भकाल के प्रारंभ से किशोर अवस्था के प्रारंभ तक करते हैं।psychology objective questions and answers pdf in hindi
  • आइजनेक के अनुसार – बाल मनोविज्ञान का संबंध बालक में मनोवैज्ञानिक प्रक्रियाओ के विकास से है। इसमें हम बालक के जन्म, शैशवावस्था, बाल्यावस्था, किशोरावस्था और परिपक्वास्था तक अध्ययन करते हैं।
  • हरलॉक के अनुसार – बाल विकास में मुख्यतः बालक के व्यवहार, रुचियों और लक्ष्यों में होने वाले उन विशिष्ट परिवर्तनों की खोज पर बल दिया जाता है। जो उसके एक विकासात्मक अवस्था से दूसरी विकासात्मक अवस्था में पदार्पण करते समय होते हैं।
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  • मानव विकास का अर्थ है, मानव में होने वाले परिवर्तनों का क्रम
  • गर्भधारण से परिपक्व अवस्था तक मानव में जो परिवर्तन होते हैं, वे सभी उसकी Growth से संबंधित होते हैं। इस परिवर्तन को हम रचनात्मक परिवर्तन कहते हैं।
  • बाल विकास में विकास से संबंधित समस्याओं का अध्ययन करने के लिए दो प्रणालियां प्रचलित हैं।
    दीर्घकालिक प्रणाली (Longitudinal Approach)
    समकालीन प्रणाली (Crossectional Approach)
  • बाल विकास से प्रत्येक आयु के बालक की व्यवहार प्रकृति को सरलता से समझा जा सकता है। और माता पिता को इस विषय का ज्ञान होना बहुत आवश्यक है।
  • बालक में सीखने की प्रक्रिया का प्रारंभ जन्म के कुछ दिनों बाद ही हो जाता है।
  • बच्चे विद्यालय के प्रति निष्ठावान होते हैं और वह विद्यालय जाकर अपने सामाजिक दायित्व को सीखते हैं।
  • विद्यालय सामाजिकरण का एक सक्रिय साधन है।
  • वृद्धि और विकास को प्रभावित करने वाले कारक – वंशानुक्रम, वातावरण, पोषण, रोग एवं चोट, घर का वातावरण, विद्यालय का वातावरण, आसपास का वातावरण, अंतः स्रावी ग्रंथियां, लिंगभेद, प्रजाति, सांस्कृतिक वातावरण आदि।
  • बालक अपने अनुभवों के द्वारा जो अर्जित करता है, उसे सामाजिक गुण कहा जाता है। यह बालक के मानसिक विकास को प्रभावित करता है।
  • सीखना क्या है – सीखना व्यवहार में स्थाई और प्रगति पूर्ण परिवर्तन है, जो अभ्यास प्रशिक्षण और पूर्व अनुभवों पर आधारित होता है।
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  • अभिवृद्धि क्या है – व्यक्ति के शरीर के आकार लंबाई तथा वजन में होने वाला परिवर्तन अभिवृद्धि कहलाता है। अभिवृद्धि को नापा और तोला जा सकता है। अभिवृद्धि का संबंध परिपक्वता से होता है। और यहा मात्रात्मक होता है।
  • अनुवांशिकता के प्रभाव के कारण प्राणी में जो जैविक परिवर्तन होते है, वही परिपक्वता या अभिवृद्धि कहलाता है।
  • विकास क्या है – विकास का तात्पर्य मानव के अंदर जन्म से लेकर मृत्यु तक होने वाले परिवर्तन है। यह परिवर्तन गुणात्मक होते हैं।
  • विकास से बालक की कार्य क्षमता, कार्यकुशलता, और उसके व्यवहार की गति का पता चलता है।
  • यह लगातार जारी रहने वाली प्रक्रिया है। विकास का स्वरूप कार्यात्मक होता है।
  • वृद्धि का स्वरूप रचनात्मक होता है, और विकास का स्वरूप कार्यात्मक होता है।
  • वृद्धि से विकास में मदद मिल सकती है, परंतु विकास से वृद्धि में कोई सहायता नहीं मिलती है।
  • वृद्धि का संबंध वंशानुक्रम से होता है जबकि विकास का संबंध मन और मस्तिष्क पर आधारित होता है।
  • वृद्धि तथा विकास के अध्ययन से शिक्षकों को बच्चों के मानसिक विकास की जानकारी मिलती है।
  • वृद्धि और विकास के अध्ययन से बालकों के संवेगात्मक विकास की जानकारी मिलती है।
  • तीव्र बुद्धि एवं सामान्य बुद्धि वाले बालकों के विकास का क्रम एक समान होता है भले ही उनके विकास की गति में अंतर हो।
  • बालकों का जो विकास है वह सामान्य से विशिष्ट की ओर होता है। बालक पहले किसी वस्तु को पकड़ने के लिए दोनों हाथों का उपयोग करता था। वही बालक कुछ दिनों के बाद उसे एक हाथ से पकड़ने लगता है।
  • जिन बालकों का मानसिक विकास अच्छा होता है उनका शारीरिक विकास ही अच्छा होता है।
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  • मस्तकाधोमुखी विकास या सिफेलोकोडल थ्योरी – इस सिद्धांत के अनुसार विकास का प्रारंभ सिर से पैर की ओर होता है। इसका मतलब है कि पहले सिर का विकास बाद में शरीर के नीचे के अंगों का विकास होता है।
  • प्रॉक्सिमोडिस्टल थ्योरी – इस सिद्धांत के अनुसार विकास केंद्र से शिरो की और होता है।
  • बाल मनोविज्ञान में बालक के जन्म से लेकर किशोरावस्था तक बालक के व्यवहार का अध्ययन किया जाता है।
  • बाल मनोविज्ञान के अंतर्गत बालक के शारीरिक, मानसिक ,सामाजिक, संवेगात्मक विकास का अध्ययन किया जाता है।
  • गुडएनफ के अनुसार – बालक का जितना भी मानसिक विकास होता है उसका आधा 3 वर्ष की आयु तक हो जाता है।
  • गर्भाधान के समय जिस गर्भितत अंडाणु जिसे जाए कोर्ट भी कहते हैं की आकृति मात्र एक सुई की नोक के बराबर होती है।
  • जन्म के समय शिशु के मस्तिष्क का भार 350 ग्राम होता है।
  • बालकों में 270 हड्डियां होते हैं जैसे-जैसे बालक परिपक्व होता जाता है हड्डियां जुड़ कर 206 रह जाती हैं।
  • 5 वर्ष का बालक अपनी जन्म की लंबाई का दोगुना हो जाता है।
  • 5 वर्ष का बालक अपने जन्म के भार से 5 गुना अधिक हो जाता है।
  • 12 से 13 वर्ष की आयु तक लड़कियों की लंबाई 58 इंच हो जाती है तथा 18 वर्ष तक के लड़कों की लंबाई 66 इंच हो जाती है।
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  • शारीरिक विकास में सबसे पहले नर्वस सिस्टम का विकास होता है।
  • शारीरिक विकास की दूसरी अवस्था 2 वर्ष से लेकर 11 वर्ष तक होती है।
  • संवेग को अंग्रेजी भाषा में इमोशन कहते हैं इमोशन शब्द की उत्पत्ति लेटिन भाषा के Emovere से हुई है।
  • संवेग दो प्रकार के होते हैं।
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    सकारात्मक संवेग – इन्हें सुखकर संवेग भी कहते हैं। प्रेम, आमोद, हर्ष, स्नेह, उल्लास, आनंद, आदि।
  • नकारात्मक संवेग – क्रोध, चिंता, घृणा, ईर्ष्या, भय आदि।
  • जन्म के समय शिशु में कोई संवेग नहीं होता है वह केवल उत्तेजना का अनुभव करता है।
  • 5 वर्ष की आयु में शिशु के संदेशों पर वातावरण का प्रभाव पड़ता है।
  • वाटसन के अनुसार – बालक में सबसे पहले भय एवं प्रेम के संवेग विकसित होते हैं।
  • पूर्व किशोरावस्था संवेगात्मक एवं सामाजिक विकास की दृष्टि से संघर्ष और तूफान का काल है।
  • मानसिक विकास की गति शैशवावस्था में अधिक तीव्र होती है।
  • किशोरावस्था में स्मरण शक्ति, सहनशक्ति, कल्पना शक्ति का विकास होता है।
  • क्रियात्मक विकास के द्वारा बालक अपनी मांसपेशियों पर नियंत्रण करना सीख जाता है।
  • शिशु के जन्म के बाद क्रियात्मक विकास की गति तीव्र होती है।
  • एम्स में क्रियात्मक विकास की केवल 14 अवस्थाएं बताएं हैं।
  • शारीरिक गतिविधियों को नियंत्रित करने की योग्यता मस्तिक से संचालित होती है।
  • क्रियात्मक विकास सामान्य से विशिष्ट की ओर होता है।
  • हरलॉक के अनुसार – सामाजिक विकास का अर्थ सामाजिक संबंधों में परिपक्वता प्राप्त करना है।
  • बालक विद्यालय में आने के पहले आत्म केंद्रित होता है।
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  • जरशील्ड के अनुसार – शिशुओं के खेल समूह में किसी भी तरह का अर्थ वेद जातिभेद रंगभेद नहीं पाया जाता है।
  • बच्चे का नैतिक विकास संवेगात्मक विकास पर आधारित होता है।
  • किशोरावस्था में दमन से अधिक शोधन और मार्गतिकरण की आवश्यकता होती है।
  • बाल विकास को वंशानुक्रम एवं वातावरण प्रभावित करते हैं।
  • ब्रिजेज के अनुसार उत्तेजना संवेगात्मक विकास का ही एक भाग है।
  • तर्क जिज्ञासा तथा निरीक्षण शक्ति का विकास 11 वर्ष की आयु में हो जाता है।
  • मांसपेशियों में वृद्धि होना शारीरिक विकास को दर्शाता है।
  • उत्तर बाल्यावस्था में बालकों में नई खोज करने की और घूमने की प्रवृत्ति बहुत अधिक बढ़ जाती है।
  • समानता, प्रत्यागमन, भिन्नता वंशानुक्रम के नियम है।
  • 8 से 9 वर्ष की अवस्था तक बालक की दृष्टि एवं श्रवण इंद्रियां पूर्ण विकसित हो चुकी होते हैं।
  • क्रो एंड क्रो के अनुसार बीसवीं शताब्दी को बालकों की शताब्दी कहा जाता है।
  • बाल्यावस्था को मिथ्या परिपक्वता का समय कहा जाता है।
  • मनुष्य जीवन का आरंभ मूलतः एक कोष उसे घटित होता है।
  • संवेदना ज्ञान की पहली सीढ़ी है यह कथन मानसिक विकास से संबंधित है
  • सीखने की गति अत्यंत तीव्र शैशवावस्था में होती है।
  • छोटा शिशु खिलौने तथा अन्य वस्तुओं को पैक कर उसके भागों को अलग-अलग करके जिज्ञासा प्रवृत्ति के भाव को दर्शाता है।
  • शैशवावस्था में शिशु के अंदर स्व प्रेम की भावना विकसित होती है जिसे नर्सिसिज्म में कहा जाता है।
  • जन्म के समय शिशु में उत्तेजना संवेग होता है।
  • भय, क्रोध, प्रेम तथा पीड़ा नामक चार मुख्य संवेग शिशु में 2 वर्ष के अंदर ही विकसित हो जाते हैं।
  • शैशवावस्था के प्रारंभिक वर्षों में सामाजिक भावना का अभाव रहता है।
  • सिगमंड फ्रायड ने लड़कों के मातृप्रेम भाग को ओडिपस ग्रंथि कहा।
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  • सिगमंड फ्रायड ने लड़की के पितृ प्रेमभाव को इलेक्ट्रा भावना ग्रंथि कहा।
  • शैशवावस्था में नैतिक भावना का अभाव रहता है।
  • वैलेंटाइन ने शैशवावस्था को सीखने का आदर्श काल कहा है।
  • वाटसन ने विकास की अन्य किसी अवस्था की तुलना में शैशवावस्था में सीखने का क्षेत्र तथा तीव्रता को अधिक व्यापक बताया है।
  • प्रारंभिक विद्यालय की आयु बाल्यावस्था को कहा जाता है।
  • बाल्यावस्था को स्कूटी अवस्था कहा जाता है।
  • बाल्यावस्था को गंदी अवस्था भी कहा जाता है।
  • एक कक्षा में अध्यापक बच्चों को पढ़ा रहे हैं कि देखो बच्चों इस अवस्था में विकास की गति मंथर हो जाती है विकास की स्थिरता बालक की मानसिक तथा शारीरिक शक्तियों को दृढ़ता प्रदान करती है उसकी चंचलता कम होने लगती है तथा वह वयस्कों के समान व्यवहार करना चाहता है यहां अध्यापक किस अवस्था के बारे में बच्चों को पढ़ा रहे हैं – बाल्यावस्था
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  • रास ने बाल्यावस्था को मिथ्या परिपक्वता का काल कहा है।
  • एक बालक मिट्टी लकड़ी कागज आदि के द्वारा कई तरह की वस्तुएं बनाता है यह बालक की किस प्रवृत्ति को इंगित करता है – रचनात्मकता को
  • किशोरावस्था जन्म के बाद मानव विकास की तीसरी अवस्था है।
  • किशोरावस्था को जीवन का सर्वाधिक कठिन काल माना गया है।
  • जीवन का सर्वाधिक कठिन काल माना जाता है – किशोरावस्था
  • किशोरावस्था को अंग्रेजी में एडोलेसन्स कहते हैं। एडोलेसन्स शब्द लेटिन भाषा के किस शब्द से बना है जिसका अर्थ है परिपक्वता की ओर बढ़ना – एडोलीसियर
  • किस मनोवैज्ञानिक ने किशोरावस्था को संघर्ष तनाव तूफान तथा विरोध की अवस्था कहा है – हाल
  • किस अवस्था को संवेगात्मक उथल-पुथल तथा तनाव की अवस्था होने के कारण समस्यात्मक अवस्था कहा जाता है – किशोरावस्था को
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  • किस अवस्था में बालक शिशु के समान अस्थिर मन वाले हो जाते हैं तथा उस अवस्था को शेस्वावस्था की पुनरावृति भी कहा जाता है – किशोरावस्था को
  • किशोरों में सौंदर्यत्मक मूल्यों का विकास किया जा सकता है – संगीत व चित्रकला के द्वारा
  • किशोरों में संवेगों का विकास किया जा सकता है – कला, साहित्य, संगीत तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों द्वारा
  • बच्चे के विकास के सिद्धांतों को समझना शिक्षक की सहायता करता है – शिक्षार्थियों के अधिगम शैलियों को प्रभावी रूप से संबोधित करने में
  • किस अवस्था के बारे में कहा जाता है कि व्यक्ति के कुल मानसिक विकास का लगभग आधा भाग इस अवस्था मे पूर्ण हो जाता है – शैशवावस्था
  • पूर्व बाल्यकाल अवस्था है – 3 से 6 वर्ष
  • इन्फेंट के भाषा का शब्द है – लैटिन
  • मानव विकास में सबसे अधिक शरीर तथा मस्तिष्क ग्रहण शील किस अवस्था में रहते हैं – शैशवावस्था में
  • किस अवस्था को मानव जीवन का आधार माना जाता है – शैशवावस्था
  • किशोरावस्था का काल है – 13 से 18 वर्ष
  • बाल्यावस्था है – 6 वर्ष से 12 वर्ष तक
  • गर्भावस्था का समय होता है – गर्भधारण से जन्म तक
  • सामान प्रजाति के विकास के प्रतिमानो में समानता पाई जाती है इस सिद्धांत का संबंध किस सिद्धांत से है – समान प्रतिमान का सिद्धांत
  • कौन सा सिद्धांत यह बताता है की भिन्न-भिन्न व्यक्तियों के विकास की गति एवं दिशा भिन्न-भिन्न होती है – व्यक्तिकता का सिद्धांत
  • वृद्धि तथा विकास में अचानक कोई आपस में परिवर्तन नहीं होता इस सिद्धांत का संबंध है – निरंतरता के सिद्धांत से
  • विकास बड़े होने तक ही सीमित नहीं है वरन इसमें प्रौढ़ावस्था के लक्ष्य की ओर परिवर्तनों का प्रगतिशील क्रम निहित रहता है, विकास के फलस्वरूप व्यक्ति में नवीन विशेषताएं तथा नवीन योग्यताएं प्रकट होती हैं विकास तथा वृद्धि की यह परिभाषा किसने दी है – हरलॉक ने
  • वृद्धि शब्द का प्रयोग किया जाता है – वृद्धि का संबंध व्यक्ति के विभिन्न अंगों के आकार लंबाई तथा भार आदि में आए परिवर्तन से है।
  • अधिगम एवं परिपक्वता के संबंध में निम्न में से कौन सा कथन सही है – वंशक्रम संभाव्य क्षमता की सीमा के कारण बालक एक निश्चित सीमा से आगे तक विकसित हो सकते हैं।
  • एक बच्चे की वृद्धि और विकास के अध्ययन की सर्वाधिक अच्छी विधि कौन सी है – विकासीय विधि
  • शिक्षक को ज्ञान होना चाहिए – अध्यापक विषय एवं बाल मनोविज्ञान का
  • बच्चों के बौद्धिक विकास की चार विशिष्ट अवस्थाओं की पहचान की गई – जीन पियाजे द्वारा
  • विकास कभी न समाप्त होने वाली प्रक्रिया है यह विचार किस से संबंधित है – निरंतरता का सिद्धांत
  • विकास के परिपेक्ष में समय के साथ होने वाले परिवर्तनों में निम्न में क्या शामिल है – रूप, दर, अनुक्रम
  • बच्चों में नैतिकता की स्थापना के लिए सर्वोत्तम मार्ग है – शिक्षक का आदर्श रूप में व्यवहार करना
  • बच्चे की जिज्ञासा शांत करनी चाहिए – तत्काल जब विद्यार्थी द्वारा जिज्ञासा की गई है।
  • नवजात शिशु स्वयं को किस प्रकार के खेल में सम्मिलित करते हैं – इंद्रिय व गत्यात्मक खेल
  • निम्नलिखित में से किस अवस्था में अपने समवयस्क के समूह के सक्रिय सदस्य हो जाते हैं – किशोरावस्था
  • निम्न में से कौन सा बच्चे की सामाजिक मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं के साथ संबंध नहीं है – शरीर से अपशिष्ट पदार्थों का नियमित रूप से बाहर निकलना
  • प्रतिबिंब अवधारणा प्रतीक एवं संकेत भाषा शारीरिक क्रिया और मानसिक क्रिया अंतर्निहित है – विचारात्मक प्रक्रिया
  • एक बच्चा कक्षा में प्रायः प्रश्न पूछता है उचित रूप में इसका अर्थ है कि – वह अधिक जिज्ञासु है
  • नवजात शिशु का भार होता है – 7 पाउंड
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  • गर्भ में बालक को विकसित होने में कितने दिन लगते हैं – 280
  • हिंदी अक्षरों को बालक किस उम्र में पहचानने लगते हैं – 4 वर्ष की आयु में
  • बालकों की सोच अमूर्तता की अपेक्षा मूर्त अनुभवों एवं प्रत्यय से होती है यह अवस्था है – 7 से 12 वर्ष
  • निम्न में से कौन सा कथन विकास के बारे में सत्य नहीं है – विकास विशिष्ट से सामान्य की ओर होता है
  • निम्न में से कौन सा विकासात्मक कार्य उत्तर बाल्यावस्था के उपयुक्त नहीं है – पुरुषोचित या स्त्रियोचित सामाजिक भूमिकाओं को प्राप्त करना
  • विकास के संदर्भ में निम्न में से कौन सा कथन सत्य है – विकास की प्रत्येक अवस्था के अपने खतरे हैं
  • बालक अपने व्यवहार की सामाजिक स्वीकृति जिस अवस्था में चाहता है वह अवस्था है – किशोरावस्था
  • उत्तर बाल्यावस्था में बालक भौतिक वस्तुओं के किस आवश्यक तत्वों में परिवर्तन समझने लगते हैं – द्रव्यमान संख्या और क्षेत्र
  • 6 से 10 वर्ष की अवस्था में बालक रुचि लेना प्रारंभ करते हैं – विद्यालय में
  • खिलौनों की आयु कहा जाता है – पूर्व बाल्यावस्था को
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