Reet Psychology Important Question and answer Part –2

Reet Psychology Important Question and answer Part – 2

नमस्कार दोस्तों कैसे हैं आप सब आज हम आपके लिए शिक्षा मनोविज्ञान के अंतर्गत Reet Psychology Important Question and answer  Part – 2 में 100 से भी ज्यादा महत्वपूर्ण प्रश्नों की श्रंखला लेकर आए हैं। जो भी छात्र Reet, Ctet, Uptet, Mptet जैसी भर्ती परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। उन सभी छात्रों के लिए यह बहुत ही उपयोगी होगा। Reet Psychology Important Question and answer  इसे भी अवश्य पड़े।

Reet Psychology Important Question Part –2
Reet Psychology Important Question Part –2

Reet Psychology Important Question and answer Part – 2

  • सोलवीं शताब्दी में मनोविज्ञान को आत्मा का विज्ञान कहा जाता था।
  • वाटसन के अनुसार मनोविज्ञान व्यवहार का शुद्ध विज्ञान है।
  • जेम्स ड्रेवर के अनुसार जीवन की संघर्षपूर्ण परिस्थितियों के प्रति मानव तथा पशु की संपूर्ण प्रतिक्रिया ही व्यवहार है।
  • स्किनर के अनुसार मनोविज्ञान शिक्षा का आधारभूत विज्ञान है।
  • बच्चे के विकास को अक्सर शारीरिक, संज्ञानात्मक, भावात्मक और सामाजिक जैसे 3 व्यापक क्षेत्रों में विभाजित किया जाता है, इन क्षेत्रों में एक एकीकृत और समग्र प्रकार में विकसित से संबंधित हैं।
  • प्रश्नावली विधि के जन्मदाता वुडवर्थ को माना जाता है।
  • मनोचिकित्सा मनोरोगियों के लिए प्रयुक्त होती है।
  • “An Introduction To Social Psychology” के रचयिता विलियम मेगडुगल है।
  • मनोविज्ञान के उपयोग की कठिनाई है – मनोविज्ञान परीक्षण मूल्य की दृष्टि से इतने महंगे होते हैं किस सभी पाठशाला में उन्हें उपलब्ध नहीं कराया जा सकता
  • “Psychology From The Standpoint of Behaviourist” किसकी रचना है – वाटसन
  • मनोविज्ञान की सहायता से अध्यापक को बुद्धि के स्वरूप का ज्ञान होता है।
  • “A Dictionary Of Psychology” जेंमस ड्राइवर के द्वारा लिखी गई पुस्तक है।
  • जब मनोविज्ञान अपनी स्वयं की मानसिक दशा का निरीक्षण करता है तो वह पद्धति कहलाती है – अंतः दर्शन पद्धति
  • प्रथम मनोवैज्ञानिक प्रयोगशाला स्थापित की गई – विलियम वुंट के द्वारा
  • प्रथम मनोवैज्ञानिक प्रयोगशाला की स्थापना कब और कहां की गई – 1889 में जर्मनी के लिंपिंजिग शहर में
  • प्रयोगात्मक मनोविज्ञान का जनक माना जाता है – विलियम वुंट को
  • किस वैज्ञानिक ने माना है कि उचित वातावरण से बुद्धि लब्धि में वृद्धि होती है – स्टीफन
  • वंशानुक्रम के सिद्धांत हैं – जनन द्रव्य की निरंतरता का सिद्धांत
  • किस सिद्धांत के अनुसार शरीर का निर्माण करने वाला जनन द्रव्य कभी नष्ट नहीं होता है – जनन द्रव्य की निरंतरता का सिद्धांत
  • जनन द्रव्य की निरंतरता का सिद्धांत के प्रतिपादक हैं – बीजमेन
  • वंशानुक्रम के नियम है – समानता का नियम
  • किस नियम के अनुसार बच्चे अपने माता-पिता के बिल्कुल समान ना होकर उनसे कुछ ना कुछ भिन्न अवश्य होते हैं – भिन्नता का नियम
  • व्यक्ति का विकास किस का परिणाम है – वंशानुक्रम और वातावरण का
  • व्यक्ति की सभी विशेषताएं कुछ हद तक अनुवांशिक और वातावरण कारकों का प्रतिफल है यह विचार किसका है – विर्ग व हंट के द्वारा
  • बालक की मूल शक्तियों का कारण उसका वंशानुक्रम होता है यह कथन है – थार्नडाइक का
  • Emile ग्रंथ की रचना किसने की – रूसो ने
  • विकासात्मक मनोविज्ञान के प्रवर्तक हैं – जीन पियाजे
  • अध्ययन संबंधी प्रथम पत्रिका “Pedagogy Seminary” किसने आरंभ की – स्टैनले हॉल
  • “Field Of Psychology’ के रचयिता है – गिलफोर्ट
  • शताब्दियों पूर्व मनोविज्ञान को किसकी शाखा माना जाता था – दर्शनशास्त्र की
  • मनोविज्ञान को स्वतंत्र विषय बनाने के लिए सबसे पहली परिभाषा दी गई – आत्मा का विज्ञान
  • इटली के मनोवैज्ञानिक पोमोलॉजी ने मनोविज्ञान को माना – मन या मस्तिष्क का विज्ञान
  • चेतना का विज्ञान मानने वाले मनोवैज्ञानिक हैं – विलियम वुंट
  • बीसवीं शताब्दी में मनोविज्ञान को व्यवहार का विज्ञान माना गया।
  • मनोविज्ञान को व्यवहार का विज्ञान मानने वाले प्रमुख मनोवैज्ञानिक अरस्तु, वाटसन, थार्नडाइक, और वुंट है ।
  • साइकोलॉजिस्ट शब्द की उत्पत्ति लैटिन शब्द से हुई है।
  • बाल विकास वातावरण और वंशानुक्रम पर निर्भर करता है।
  • एक बाल केंद्रित कक्षा में बच्चे सामान्यतः व्यक्तिगत और सामूहिक दोनों ही रूपों में सीखते हैं।
  • अनुभूति बच्चे और वातावरण के बीच अंतः क्रिया की निरंतर प्रतिक्रिया के माध्यम से विकसित होती है यह सिद्धांत में प्रतिबिंबित होता है – पियाजे का संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत
  • शिक्षण से अधिगम पर बल देने वाला परिवर्तन हो सकता है – बाल केंद्रित शिक्षा पद्धति अपनाकर
  • मानव विकास को क्षेत्रों में विभाजित किया जाता है बे है – शारीरिक, संज्ञानात्मक, संवेगात्मक, और सामाजिक
  • वर्तमान में मनोविज्ञान है – व्यवहार का विज्ञान
  • मनोविज्ञान शिक्षा में बालकों का ध्यान रखा जाता है – अभिक्षमता का, रुचिका, योग्यता का
  • मनोविज्ञान को शुद्ध विज्ञान माना है – जेम्स ड्रेवर ने
  • मनोविज्ञान आचरण व व्यवहार का यथार्थ विज्ञान है उक्त परिभाषा – मेगडुगल ने दी
  • मनोविज्ञान के अंतर्गत मानव का अध्ययन किया जाता है।
  • कौन सा क्षेत्र मनोविज्ञान के अंतर्गत नहीं आता है – असामान्य मनोविज्ञान
  • तुम मुझे कोई भी बालक दो और मैं उसे कुछ भी बना सकता हूं यह दावा किसका है – वाटसन
  • किस विचारक ने बालक के प्रारंभिक अनुभवों पर बल दिया और किंडर गार्डन विधि का विकास किया – फ्रोबेल
  • बाल मनोविज्ञान में बालक के गर्वकालीन अवस्था से परिपक्व अवस्था तक का अध्ययन किया जाता है।
  • प्रथम बाल गृह की स्थापना न्यूयॉर्क में 1887 मैं हुई थी।
  • भारत में बाल अध्ययन की शुरुआत 1930 में की गई।
  • विकास की प्रक्रिया शुरू होती है – गर्भधारण से
  • प्लेटो द्वारा रचित पुस्तक है – रिपब्लिक
  • आधुनिक मनोवैज्ञानिक बाल मनोविज्ञान के स्थान पर बाल विकास शब्द का उपयोग करने लगे हैं।
  • सामान्य गर्भधारण के 280 दिन बाद शिशु का जन्म होता है।
  • कमीनियस ने “School Of Infancy” की स्थापना की – 17 वीं शताब्दी में
  • बाल विकास का सर्वप्रथम वैज्ञानिक विवरण प्रस्तुत किया – पेस्टोलोजी ने
  • पेस्टोलॉजी ने अपने ही साडे 3 वर्षीय पुत्र पर अध्ययन किया।
  • “Infant Child Development” नामक पुस्तक के रचयिता प्रेयर है।
  • “Biographical Sketch Of An Infant” नामक पुस्तक के लेखक डार्विन है।
  • “The Mind Of The Child” नामक पुस्तक का प्रकाशन प्रेयर ने करवाया था।
  • अमेरिका में चले बाल अध्ययन आंदोलन के जन्मदाता थे – स्टैनले हॉल
  • 19वीं शताब्दी में अमेरिका में बाल अध्ययन आंदोलन की शुरुआत हुई थी
  • बाल विकास के विस्तार को विकासात्मक मनोविज्ञान कहा जाता है।
  • व्यक्ति के विकास के लिए वंशानुक्रम और वातावरण का मुख्य योगदान होता है।
  • जन्म के समय बालक का भार 6 से 8 पौंड होता है।
  • बच्चे अपने वातावरण के साथ संबंध बनाते हुए अपनी समज का विकास कर लेते हैं यह कथन पियाजे के द्वारा दिया गया है।
  • बालक बालिकाओं के काम प्रवृत्ति बाल्यावस्था में शिफ्ट हो जाती है।
  • मस्तकाधोमुखी सिद्धांत के अनुसार विकास की क्रिया का आरंभ सिर से होता है।
  • बालक का सर्वागीण विकास उसके गामक विकास पर अधिक अव्वल है।
  • शेस्वावस्था में बालक में अनुकरण की भावना पाई जाती है।
  • असामान्यता के जैविक कारणों के अंतर्गत अंतः स्त्रावी ग्रंथियों का प्रभाव शामिल होता है।
  • बौद्धिक असामान्य ता अथवा विशिष्ट बालकों के अंतर्गत निम्नलिखित बालक आते हैं – प्रतिभाशाली बालक
  • शारीरिक विकलांग बालक विकलांग बालकों के अंतर्गत आते हैं।
  • मानव विकास जैविक व सामाजिक दो कारकों पर निर्भर करता है।
  • 12 वर्ष की लड़कियां लड़कों से लंबी होती हैं।
  • जिस स्तर पर सामाजिक मान्यता प्राप्त करने के लिए संघर्ष उत्पन्न होता है वह है – किशोरावस्था
  • नैतिक मूल्यों का विकास किया जा सकता है यदि अध्यापक – स्वयं उन पर आचरण करें
  • बच्चों की शारीरिक व्रद्धि की दर अधिक होती है – पूर्व बचपन में उत्तर बचपन की बजाय
  • वाटसन ने नवजात शिशु में मुख्य रूप से किन संवेगों की बात कही है – भय, क्रोध और स्नेह
  • किशोरावस्था की विशेषता को सर्वोत्तम रूप से व्यक्त करने वाला शब्द है – परिवर्तन
  • मनोवैज्ञानिक भाषा में सीखने को अधिगम कहा जाता है।
  • अधिगम से अभिप्राय अभ्यास या अनुभवों के द्वारा व्यवहार में परिवर्तन लाने की प्रक्रिया से है।
  • सीखना अनुभव द्वारा व्यवहार में परिवर्तन है।
  • वुडवर्थ के अनुसार नवीन ज्ञान तथा नवीन प्रतिक्रियाओं का अर्जन करने की प्रक्रिया अधिगम कहलाती है।
  • स्किनर के अनुसार प्रगतिशील व्यवहार व्यवस्थापन की प्रक्रिया को सीखना कहते हैं।
  • गेटस के अनुसार अनुभव तथा प्रशिक्षण के द्वारा व्यवहार में परिवर्तन अधिगम है।
  • गिलफोर्ड के अनुसार व्यवहार के कारण व्यवहार में आया कोई भी परिवर्तन अधिगम है।
  • क्रो एंड क्रो के अनुसार आदतों ज्ञान तथा अभी व्रतियों का अर्जन ही अधिगम है।
  • गत्यात्मक अधिगम – जब भी व्यक्ति शारीरिक रूप से गतिशील या कर्म इंद्रियों के द्वारा अधिगमकर्ता है तो इसे गत्यात्मक अधिगम कहते हैं। ex – साइकिल चलाना, पियानो बजाना, क्रिकेट खेलना, टाइपिंग करना
  • संज्ञानवादी अधिगम – ऐसा अधिगम जो व्यक्ति को ज्ञानेंद्रियों के माध्यम से मस्तिष्क में हुआ हो अथवा किसी भी समस्या को हल करते हुए सीखा जाए तो यहां अधिगम समस्या समाधान अधिगम कहलाता है। ex – निबंध लिखना, गणित की समस्याओं का समाधान करना, चिंतन करना आदि।
  • आर.एम.गेने  ने अपनी पुस्तक “द कंडीशन ऑफ लर्निंग” मैं अधिगम के 8 प्रकार बताए हैं।
  • अधिगम के तीन अनुच्छेद होते हैं। ज्ञानात्मक अनुक्षेत्र, क्रियात्मक अनुक्षेत्र, भावात्मक अनुक्षेत्र
  • रटने को हम बैंकिंग मॉडल कहते हैं।
  • सीखने को हम प्रोग्रामिंग मॉडल कहते हैं।
  • अधिगम के व्यवहारवादी सिद्धांत को अधिगम का संबंधवादी सिद्धांत कहते हैं।
  • थार्नडाइक ने सीखने की मुख्य तहत 3 नियम बताए हैं।
  1. तत्परता का नियम – इस नियम के अनुसार यदि हम किसी कार्य को सीखने के लिए तैयार होते हैं तो उसे हम शिघ्र ही सीख जाते हैं।
  2. अभ्यास का नियम – इसे उपयोग व अनुप्रयोग का नियम कहते हैं अभ्यास का नियम का अर्थ किसी क्रिया को बार-बार दोहराने से दृढ़ होता है।
  3. प्रभाव परिणाम का नियम – इस सिद्धांत को संतोष असंतोष का नियम भी कहते हैं।
  • थार्नडाइक के सीखने के 5 गुण नियम बताए हैं।
  1. बहु प्रतिक्रिया का नियम – जब हम कोई नया कार्य करना या सीखना चाहते हैं, तो उसके प्रति अनेक क्रियाएं करते हैं।
  2. आत्मिक करण का नियम – हम नवीन ज्ञान का आत्मिक करण कर अपने पूर्व ज्ञान का स्थाई अंग बना लेते हैं।
  3. मनोवृति का नियम – यदि प्राणी मानसिक रूप से किसी कार्य को सीखने के लिए तैयार नहीं है तो वहां उस कार्य को सीख नहीं पाएगा।
  4. आंशिक क्रिया का नियम – किसी कार्य को छोटे-छोटे भागों में विभाजित करने से कार्य सरल व सुगम हो जाता है।
  5. साहचर्य परिवर्तन का नियम – इस नियम का अर्थ पहले कभी की गई क्रिया को उसी सामान दूसरी स्थिति में करना है।
  • थार्नडाइक ने सीखने के सिद्धांत का प्रतिपादन सन 1898 में अपनी पीएचडी शोध प्रबंध जिसका शीर्षक “एनिमल इंटेलिजेंस” था। वह प्रथम अमेरिकी मनोवैज्ञानिक थे जिन्होंने पशुओं पर प्रयोग किया।
  • उद्दीपक – वह वस्तु या स्थिति जो किसी भी व्यक्ति को कार्य करने के लिए प्रेरित करती है उद्दीपक कहलाती है। जैसे-भोजन,पानी
  • अनुक्रिया – उद्दीपक के अनुसार किया जाने वाला कार्य अनुप्रिया है। जैसे-भोजन को खाना, पानी पीना
  • थार्नडाइक एक अमेरिकी मनोवैज्ञानिक थे, इन्होंने बिल्ली और चूहा,मछलियों तथा मुर्गियों के ऊपर अनेक प्रयोग किए। और सीखने का संबंधबाद या उद्दीपन-अनुक्रिया जैसे नियम बनाएं।
  • थार्नडाइक का संबंध वाद का सिद्धांत छोटे तथा मंदबुद्धि बालकों के लिए अत्यंत उपयोगी है इस सिद्धांत से बालकों में परिश्रम के प्रति आशा का संचार होता है तथा धैर्य ऒर परिश्रम के गुणों का विकास होता है।
  • पॉवलाव एक रूसी मनोवैज्ञानिक थे, इन्होंने शास्त्रीय अनुबंधन का सिद्धांत 1904 में प्रतिपादित किया।
  • पॉवलाव को अनुबंधन का जनक कहा जाता है, पॉवलाव ने कुत्ते की परेटिड ग्रंथि का ऑपरेशन करते हुए यह प्रयोग किया।
  • पॉवलाव को इस कार्य के लिए सन उन्नीस सौ चार में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
  • पावलव के अनुसार अनुक्रिया दो प्रकार की होती हैं।
  • स्वाभविक अनुक्रिया – यह अनुक्रिया जन्मजात होती हैं।
  • अस्वाभाविक अनुक्रियाएं – यह अनुक्रिया अर्जित व मनोवैज्ञानिक होती हैं।

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