Reet Psychology Important Question Part – 1

Reet Psychology Important Question Part – 1

Reet Psychology Important Question Part – 1 नमस्कार दोस्तों आज की यह पोस्ट बहुत ही इंपॉर्टेंट इस पोस्ट में हमने Reet Psychology Important Question and Answer के उन सभी प्रश्नों को शामिल किया है, जो पिछली परीक्षाओं में पूछे जा चुके हैं और प्रश्नों के साथ-साथ हमने प्रश्नों सेे संबंधित सभी तथ्यों को शामिल किया है। यदि आप Reet, Ctet, Uptet, Mptet या फिर किसी भी स्टेट मैं टीचर भर्ती कीीीीी तैयारी कर रहे हैं. तो आपको यह पोस्ट जरूर पढ़ना चाहिए।

Reet Psychology Important Question
                             Reet Psychology Important Question

 

Reet Psychology Important Question Part – 1

  • मनोविज्ञान की प्रथम प्रयोगशाला की स्थापना जर्मनी के लिपिंजिग शहर के कार्लमार्क्स विश्वविद्यालय में 1879 ईस्वी में विलियम वुंट के द्वारा की गई थी। और प्रयोगात्मक मनोविज्ञान का जनक विलियम वुंट को कहा जाता है।
  • संरचनावाद विधि के जनक और अंतः दर्शन विधि के जनक विलियम वुंट को कहा जाता है।
  • मनोविज्ञान को दर्शनशास्त्र से अलग करने का श्रेय विलियम वुंट को जाता है।
  • बालक बालिकाओं की सबसे ज्यादा खिलौनों में रुचि पूर्व बाल्यावस्था में होती है, Reet Psychology Important Question पूर्व बाल्यावस्था का समय 3 से 6 वर्ष होता है इस अवस्था में बालकों की खिलौनों में सर्वाधिक रूचि देखी जाती है।
  • खेल की आयु Game age बाल्यावस्था को कहा जाता है।
  • पुरुषोचित या स्त्रियोचित सामाजिक भूमिकाओं को प्राप्त करना यह गुण किशोरावस्था में देखा जाता है, और बाल्यावस्था में बालक में समलिंगी संभावना पाई जाती है।
  • प्रक्षेपण का अर्थ – अपनी असफलता का दोश दूसरों पर डालना प्रक्षेपण कहलाता है।
  • विस्थापन का अर्थ – अपने आक्रोश को उस जगह व्यक्त करना जहां पुनः आक्रमण की संभावना ना हो।
  • प्रतिक्रिया निर्माण का अर्थ – अपने मूल स्वभाव से विपरीत व्यवहार करने की प्रक्रिया
  • उदात्तीकरण का अर्थ – असामाजिक मूल प्रवृत्तियों को सामाजिक मूल प्रवृत्तियों में बदलना
  • मित्रों द्वारा उपहास उड़ाना एक प्रकार का सकारात्मक दंड है।
  • समावेशी शिक्षा की नीव सलमान का सम्मेलन में रखी गई, यह सम्मेलन 11 जून 1944 में हुआ।
  • समावेशी शिक्षा के तहत किसी भी बालक के साथ जाति, भाषा, लिंग, धर्म, शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, संवेगात्मक, आर्थिक दृष्टि से कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा।
  • समावेशी शिक्षा के तहत निशक्त बच्चों को सामान्य बालकों के साथ पढ़ाते हुए विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराने का कार्य समावेशी शिक्षा के तहत किया जाता है।
  • समायोजन क्या है – व्यक्ति की आवश्यकता एवं उन्हें प्रभावित करने वाले कारकों के मध्य संतुलन स्थापित करने की प्रक्रिया समायोजन कहलाती है। यह परिभाषा बोरिंग,लेगफील्ड,वेल्ड के द्वारा दी गई है।
  • जीन पियाजे का संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत मैं बौद्धिक विकास की चार अवस्थाएं बताई
  1.  संवेदी पेशीय गामक विकास – 0 से 2 वर्ष , 18 महीने के बाद बालक में वस्तु स्थायित्व की भावना का विकास हो जाता है।
  2.  पूर्व संक्रियात्मक विकास – 2 से 7 वर्ष , इस विकास में बालकों में प्रति क्रियात्मक भावना का विकास हो जाता है, इस कारण बालक निर्जीव वस्तुओं में सजीव वस्तुओं को ढूंढने लगता है उनकी कल्पना करने लगता है।
    Ex – आज सूरज उदास है।
  3.  मूर्त संक्रियात्मक विकास – 7 से 12 वर्ष , किस अवस्था में बालक मूर्त ( प्रत्यक्ष ) चिंतन करने लगता है। इस अवस्था में बालक में तर्क वितर्क करने की भावना का विकास हो जाता है।
  4. औपचारिक क्रियात्मक विकास – 12 वर्ष के बाद , इस अवस्था में बालक अमूर्त चिंतन करने लगता है।
  • विकास कभी न समाप्त होने वाली प्रक्रिया है, यह विकास के निरंतरता के सिद्धांत से संबंधित है विकास गर्भावस्था से मृत्यु पर्यंत तक लगातार चलता रहता है। Reet Psychology Important Question
  • जब बालको को किसी शब्द, अक्षर, वाक्य, को पढ़ने, बोलने और उच्चारण करने में कठिनाई का अनुभव होता है, तो वह डिसलेक्सिया विकास से पीड़ित है।
  • द कंडीशन ऑफ लर्निंग पुस्तक के लेखक रॉबर्ट एम गेने हैं। इस पुस्तक की रचना सन 1970 में रॉबर्ट एम गेने के द्वारा की गई थी।
  • रॉबर्ट एम गेने ने अधिगम के 8 प्रकार बताए हैं
  1. संकेत अधिगम
  2. उद्दीपक अधिगम,
  3. श्रंखला अधिगम,
  4. शाब्दिक अधिगम,
  5. विभेद अधिगम
  6. प्रत्यय अधिगम
  7. नियम व सिद्धांत अधिगम
  8. समस्या समाधान
  • रॉबर्ट एम गेने के अनुसार अधिगम का सबसे उच्चतर स्तर है समस्या समाधान है।
  • रॉस के अनुसार चिंतन मानसिक प्रक्रिया का ज्ञानात्मक पहलू है
  • ड्रेगन के अनुसार चिंतन मन की क्रिया है।
  • हम्फ्रे के अनुसार चिंतन एक जटिल प्रक्रिया है जिसके सहायता से व्यक्ति अपनी समस्याओं का समाधान करता है।
  • कागन+हेमन के अनुसार चिंतन प्रतिमाओं, प्रतीकों, संकेतों नियम व अन्य मध्यस्थ इकाइयों के मानसिक जोड़ तोड़ के प्रक्रिया है।
  • मानव का व्यक्तित्व व विकास वंशक्रम वह वातावरण की अंतः क्रिया का परिणाम है।
  • टॉयलर के अनुसार यह स्थितियां मानसिक मूल्यांकन है जो संघर्ष और चिंता के पहलू हैं।
  • हावर्ड गार्डनर के अनुसार शारीरिक गतिक बुद्धि नृत्य करने वालों में पाई जाती है।
  • हावर्ड गार्डनर के अनुसार एक व्यक्ति में 9 प्रकार की बुद्धि पाई जाती है.
  • Reet Psychology Important Question
  1. शाब्दिक बुद्धि
  2. तार्किक बुद्धि
  3. स्थानिक बुद्धि
  4. शारीरिक गति
  5. संगीत गति
  6. अंतरा व्यक्तित्व बुद्धि
  7. अंतः व्यक्तित्व बुद्धि
  8. प्राकृतिक बुद्धि
  9. अस्तित्ववाद बुद्धि
  1. कर्मकांड
  2. कर्मकांडता
  3. कर्मकांडबाद
  • व्यक्तित्व के पंचशील सिद्धांत के प्रतिपादक हैं – मेकाकरे व कोस्टा
  • अपसारी चिंतन में प्रवाहिता, लोचशीलता, मौलिकता के गुण पाए जाते हैं।
  • गेट्स के अनुसार अधिगम-अनुभव और प्रशिक्षण के द्वारा व्यवहार में परिवर्तन होता है।
  • जब तक शिक्षक को अपने बालकों की त्रुटियों का ज्ञान होना चाहिए जिसके माध्यम से बालकों को उपचारात्मक शिक्षण करवाया जा सके।
  • गृह कार्य के माध्यम से बालकों का आकलन करने में सहायता मिलती है।
  • बालक बालिकाओं की शैक्षणिक समस्या के कारणों का पता नैदानिक परीक्षण द्वारा किया जाता है और उसका समस्या समाधान उपचारात्मक कार्य के द्वारा किया जाता है।
  • समावेशी शिक्षा के तहत विशेष आवश्यकता वाले बालकों को अन्य सामान बालकों (Reet Psychology Important Question) के साथ शिक्षा उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
  • शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 24 के तहत शिक्षकों के कर्तव्यों का उल्लेख किया गया है।
  • शेपिंग शब्द का संबंध स्किनर से है। स्किनर ने चूहे और कबूतर को शेपिंग के माध्यम से सही अनुक्रिया करने के लिए आकर्षित किया था।
  • सीखने का प्रतिफल एक वर्तुलाकार प्रक्रिया है। क्योंकि इसका संबंधित प्रत्येक कक्षा कि प्रत्येक विषय वस्तु के साथ होता है।
  • औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था में बालक उद्देश्य पूर्ण चिंतन करता है।
  • मूर्त संक्रियात्मक अवस्था में बालक दो वस्तुओं के मध्य तुलना कर लेता है।
  • जीन पियाजे के अनुसार अधिगम के अंतर्गत दो क्रियाएं होती हैं। आत्मीकरण और समायोजन
  • आत्मीकरण का अर्थ किसी नए ज्ञान को ग्रहण करना है और उसके बाद नए ज्ञान को पूर्व ज्ञान से जोड़ना ही समायोजन है।
  • बाल मनोविज्ञान को परिभाषित करने वाले मनोवैज्ञानिक वर्क हैं।
  • बाल मनोविज्ञान के जनक स्टेनली हॉल को कहा जाता है।
  • श्रीमती हरलॉक के अनुसार बालक के शरीर और उसकी संरचना में होने वाली मात्रात्मक परिवर्तन को ही अभिवृद्धि कहते हैं।
  • सोरेनस के अनुसार शरीर और उसके अंगों में होने वाली मात्रात्मक बढ़ोतरी को ही अभिवृद्धि कहते हैं।
  • वृद्धि एक मात्रात्मक परिवर्तन है जबकि विकास एक गुणात्मक परिवर्तन है।
  • वृद्धि की दिशा सिर से पैर की ओर होती है, और आयु में वृद्धि के साथ-साथ शरीर में भी वृद्धि होती है
  • एक व्यक्ति के शरीर में 46 क्रोमोसोम होते हैं कुल 23 जोड़े होते हैं।
  • शरीर की वृद्धि के लिए थायराइड ग्रंथि उत्तरदाई होती है, यह गंदी गली में पाई जाती है।
  • महिलाओं में xx क्रोमोसोम्स होते हैं और पुरुषों में Xy क्रोमोसोम्स होते हैं।
  • वृद्धि से तात्पर्य मानव शरीर और उसके अंगों में होने वाला मात्रात्मक परिवर्तन है।
  • जीन पियाजे के अनुसार मूर्त संक्रियात्मक अवस्था में बालक के चिंतन की प्रकृति कार्तिक होती है।
  • विकास की प्रक्रिया सामान्य से विशिष्ट की ओर होती है।
  • वृद्धि का संबंध विकास से है विकास स्वतंत्र व चहुमुखी होता है।
  • संज्ञानात्मक विकास या बौद्धिक विकास का सिद्धांत जीन पियाजे ने दिया था।
  • नैतिक विकास का सिद्धांत कोहल वर्ग ने दिया था।
  • सामाजिक विकास का सिद्धांत बंडूरा वॉल्टन ने दिया था।
  • भाषा विकास का सिद्धांत नोम चोमस्की ने दिया था।
  • संवेगात्मक विकास की मूल प्रवृत्तियां गोलमैन के द्वारा बताई गई
  • लैंगिक विकास का सिद्धांत सिगमंड फ्रायड ने दिया था।
  • मनोसामाजिक विकास का सिद्धांत इरेक्शन द्वारा दिया गया था।
  • परिपक्वता का सिद्धांत गेसेल दिया है।
  • Reet Psychology Important Question
  • मानव के विकास की गति की दिशा सिर से पैरों की ओर होती है इसे हम ममस्तकाधोमुखी विकास कहते हैं। या इसे हम सिफेलोकोडल भी कहते हैं।
  • जब विकास की दिशा केंद्र से परिधि की ओर होती है, तो इसे हम प्रॉक्सिमोडिस्टल कहते हैं।
  • बालकों में पहले सामान्य योग्यताएं विकसित होती हैं फिर विशिष्ट योग्यताओं का विकास होता है यह सिद्धांत सामान्य से विशिष्ट प्रक्रिया का सिद्धांत है।
  • बालक का विकास एक पक्षी नहीं होता बल्कि विकास एक दूसरे से जुड़े हुए होते हैं बुद्धि का विकास तेज होने पर सभी विकास तेज होते हैं।
  • वंशानुक्रम का अर्थ है एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में पहुंचने वाले गुण।
  • बालक का विकास जिस वातावरण में होता है वह वातावरण बालक के विकास को प्रभावित करता है।
  • जो बालक पहले जन्म लेते हैं उनकी तुलना में बाद में जन्म लेने वाले बालकों का विकास अधिक होता है।
  • खेल के मैदान में बालक का शारीरिक, मानसिक, संवेगात्मक, नैतिक, सामाजिक विकास होता है।
  • बालकों के विकास को ग्रंथियों से निकलने वाले हार्मोन प्रभावित करते हैं लंबाई में वृद्धि को प्रभावित करने वाली ग्रंथि थायराइड ग्रंथि होती है और थायरोक्सिन हार्मोन होता है।
  • हर प्रजाति के विकास में भिन्नता पाई जाती है और बालक का विकास प्रजाति के अनुसार ही होता है।
  • मानव विकास की पांच अवस्थाएं हैं।
  • Reet Psychology Important Question
  • गर्भावस्था – यह अवस्था 0 से जन्म तक होती है 280 दिन या 330 दिन
  • शैशवावस्था – यह अवस्था जन्म से 5 या 6 वर्ष होती है।
  • बाल्यावस्था – यह अवस्था 5 या 6 वर्ष से 12 या 13 वर्ष तक होती है। इसमें पूर्व बाल्यावस्था का समय 3 से 7 वर्ष होता है और उत्तर बाल्यावस्था का समय 7 से 12 वर्ष होता है।
  • किशोरावस्था – यह अवस्था 13 से 18 वर्ष तक होती है।
  • प्रौढ़ावस्था – 19 वर्ष से ऊपर का समय प्रौढ़ावस्था में आता है।
  • गर्भावस्था को तीन भागों में बांटा गया है।
  • डिंबा वस्था – यह अवस्था गर्भाधान से 2 सप्ताह तक होती है।
  • पिंड अवस्था या भ्रूण अवस्था – यह अवस्था 2 सप्ताह से 2 महीने तक की होती है।
  • गर्भस्थ शिशु की अवस्था – यह अवस्था 3 महीने से 9 महीने तक होती है।
  • सिगमंड फ्रायड के अनुसार बालक को जो भी बनना होता है वह प्रारंभ के चार से 5 वर्षों में बन जाता है।
  • वैलेंटाइन के अनुसार शैशवावस्था सीखने का आदर्श काल होती है।
  • बृजेश के अनुसार 2 वर्ष की उम्र तक बालक में सभी संवेगों का विकास हो जाता है।
  • हरलॉक के अनुसार शैशवावस्था एक खतरनाक काल एवं अपीली काल है।
  • गुड एन एस के अनुसार व्यक्ति का मानसिक विकास जितना होता है उसका आधा 3 वर्ष में हो जाता है।
  • मन के भावों की उत्तेजित दशा को संवेग या मूल प्रवृत्तियां कहते हैं।
  • शैशवावस्था में भय नामक संवेग सर्वाधिक सक्रिय रहता है।
  • फ्राइड के अनुसार काम अवस्था का विकास कैसे अवस्था में प्रारंभ हो जाता है।
  • फ्राइड के अनुसार बाल अवस्था में काम की भावना सुषुप्त अवस्था में रहती है।
  • किशोरावस्था में कान की भावना का पूर्ण विकास होता है।
  • शैशवावस्था में बालक स्व केंद्रित व आत्मकेंद्रित होता है, वह अपनी चीजें दूसरों को नहीं देता।
  • शैशवावस्था में क्षणिक संवेग पाया जाता है अर्थात मन के भागों को संवेगों के द्वारा व्यक्त किया जाता है।
  • शैशव अवस्था में बालक पर निर्भर दूसरों पर निर्भर होता है।
  • शैशव अवस्था में बालक  अनुकरण की क्रिया से सीखता है।
  • Reet Psychology Important Question
  • शैशव अवस्था में बालक का मानसिक और शारीरिक विकास तीव्र गति से होता है।
  • सिगमंड फ्रायड ने बाल अवस्था को जीवन का निर्माण काल कहा क्योंकि इस अवस्था में बालक की आदतों व्यवहार रुचि इच्छा का निर्धारण होता है।
  • किल पैट्रिक ने बाल्यावस्था को प्रतिद्वंदात्मक अवस्था कहां है,प्रतिद्वंदात्मक का अर्थ है दूसरों से आगे निकलना।
  • रॉस ने  बाल्यावस्था छदम व मिथ्या का काल कहा है।
  • कॉल एंड ब्रश के अनुसार बाल्यावस्था जीवन का अनोखा काल है क्योंकि इस काल में बालक जैसे-जैसे बड़ा होता है उसके व्यवहार में बदलाव आते हैं माता पिता को उन्हें समझने में कठिनाई होती है।
  • औपचारिक शिक्षा का प्रारंभ 5 या 6 साल में हो जाता है।
  • बाल्यावस्था मे बालक भी समलिंगी समूह का सदस्य बन जाता है, और इस अवस्था में बालक में संग्रह करने की प्रवृत्ति पाई जाती है।
  • किलपैट्रिक के अनुसार सर्वाधिक सामाजिक विकास बाल्यावस्था में होता है।
  • बाल्यावस्था को स्थूल संक्रियात्मक अवस्था कहा जाता है।
  • बिना कार्य के भटकने की अवस्था बाल्यावस्था को कहा जाता है।
  • बाल्यावस्था को सर्जनशीलता की विकास की अवस्था कहा जाता है।
  • बाल्यावस्था में जिज्ञासा की प्रवृत्ति पाई जाती है।
  • किशोरावस्था के जनक स्टैनले हॉल को कहा जाता है।
  • किलपैट्रिक ने किशोरावस्था को जीवन का सबसे कठिन काल कहां है।
  • किशोरावस्था को ब्यूटी ऐज, टीनएज कहा गया है।
  • रॉस के अनुसार समाज सेवा की भावना का विकास किशोरावस्था में होता है।
  • हेडी कमेटी के अनुसार 12 वर्ष की अवस्था में बालक की नसों में ज्वार (जोश) उठना शुरू हो जाता है।
  • किशोर अवस्था में संवेगात्मक अस्थिरता पाई जाती है अर्थात विचारों में अस्थिरता होती है।
  • स्टैनले हॉल के अनुसार बालक के शरीर में किशोरावस्था में अचानक परिवर्तन देखने को मिलता है जबकि ठंडा इतने स्टैनले हॉल के इस विचार का विरोध किया कहा परिवर्तन अचानक नहीं होते हैं क्रमबद्ध होते हैं।
  • सर्वाधिक काम प्रवृत्ति की भावना किशोरावस्था में पाई जाती है।
  • किशोरावस्था tartik और अमूर्त चिंतन की अवस्था है।

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“जय हिंद जय भारत”

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