Subhash Chandra Bose Essay In Hindi | नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर निबंध 2021

Subhash Chandra Bose Essay In Hindi- नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारत के महान देशभक्त और बहादुर स्वतंत्रता सेनानी थे। वह स्वदेश अनुराग और जोशपूर्ण देशभक्ति के एक प्रतीक थे। हर भारतीय बच्चे को उनको और भारत की स्वतंत्रता के लिए किए गए उनके कार्यों के बारे में जरूर जानना चाहिए।

नाम सुभाष चन्द्र बोस
जन्म 23 जनवरी 1897
जेल की यात्रा 11 बार
पिता का नाम श्री जानकीदास बॉस
माता का नाम श्रीमती प्रभावती
कुल भाई-बहन 14
पत्नी का नाम Emilie Schenkl
बेटी Anita Bose Bfaff

 

Subhash Chandra Bose Essay In Hindi-

Subhash Chandra Bose Essay In Hindi
Subhash Chandra Bose Essay In Hindi

सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 ईस्वी को ओडिशा राज्य के कटक में हुआ था। उनके पिता श्री जानकीदास बॉस वहां के अच्छे वकीलों में गिने जाते थे। उस समय उड़ीसा बंगाल प्रदेश का ही अंग था। सुभाष जी की माता का नाम श्रीमती प्रभावती था। उनके बड़े भाई शरद चंद्र बोस उस युग के अच्छे जन नेता थे। सुभाष चंद्र बोस पर अपने माता पिता व भाई के अतिरिक्त कटक की प्राथमिक पाठशाला के मुख्य शिक्षक श्री बेनीमाधव जी का विशेष प्रभाव पड़ा। स्वामी रामकृष्ण और विवेकानंद के विचारों से भी सुभाष चंद्र बोस बहुत प्रभावित थे।

सुभाष चंद्र बोस कुशाग्र बुद्धि के छात्र थे। (Subhash Chandra Bose Essay In Hindi) उन्होंने प्रत्येक परीक्षा अच्छे अंको से उत्तीर्ण की उच्च शिक्षा के लिए प्रेसीडेंसी कॉलेज कोलकाता में दाखिल हुए। वहां उन्होंने दर्शनशास्त्र से बीए ऑनर्स किया। इसी दौरान उन्होंने देखा कि कॉलेज के अंग्रेज अध्यापक भारतीयों छात्रों का बड़ा अपमान करते हैं। इससे नेताजी के स्वाभिमान और देशभक्ति को ठेस पहुंची।

एक अंग्रेज अध्यापक के अत्याचार को बे सहन नहीं कर सके। और उसकी जमकर पिटाई कर दी। नतीजा यह हुआ कि उन्हें कॉलेज से निकाल दिया। गया बाद में सन 1912 में उनके निष्कासन को रद्द कर दिया गया। सुभाष जी ने बीए की परीक्षा स्कॉटिश चर्च कॉलेज से प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की।

Subhash Chandra Bose Essay In Hindi

इसके बाद भी उच्चतर शिक्षा प्राप्त करने के लिए इंग्लैंड गए । आई.सी.एस में उन्हें चौथा स्थान प्राप्त हुआ। उन्होंने आई.सी.एस से त्यागपत्र दे दिया। क्योंकि उनके स्वाभिमान ने अंग्रेजों की गुलामी करने से इंकार कर दिया था।

सन 1920 में सुभाष चंद्र बोस भारत लौट आए। उस समय स्वाधीनता प्राप्ति के लिए गांधी जी के नेतृत्व में असहयोग आंदोलन चलाया जा रहा था। बंगाल में देशबंधु चितरंजन दास इस आंदोलन के नेता थे। देशबंधु से प्रेरित होकर सुभाष चंद्र स्वयं सेवक दल के कैप्टन बन गए। असहयोग आंदोलन में सक्रिय भाग लेने के कारण उनके देशबंधु और मौलाना आजाद के साथ जेल जाना पड़ा।

कारागार में ही सुभाष चंद्र ने दीनबंधु से प्रभावित होकर उन्हें अपना राजनीतिक गुरु बना लिया। जब गांधी जी ने असहयोग आंदोलन स्थगित किया, (Subhash Chandra Bose Essay In Hindi) तब सुभाष चंद्र जेल से रिहा होकर आए। उन्होंने अनेक वार जेल की यात्रा की इसी जेल यात्रा के दौरान एक बार उन्हें भारत से निष्कासित करके मांडले जेल भेज दिया गया।

द्वितीय विश्व युद्ध शुरू होने पर उन्हें अपने ही घर में नजरबंद कर दिया गया। वे वेश बदलकर पेशावर पहुंचे। और वहां से पठानी वेश में जर्मनी पहुंच गए। वहां उन्होंने हिटलर और मुसोलिनी आदि नेताओं से मुलाकात की, सुभाष चंद्र बोस जर्मनी से टोकियो पहुंचे वहां उन्होंने भारतीयों के नाम अपना संदेश दिया।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर जाकर “आजाद हिंद फौज” का गठन किया। और उसकी कमान अपने हाथ में ले ली। इस सेना ने अंग्रेजों की सेनाओं को कई स्थानों पर हराया। और भारतीय सीमा में प्रवेश किया, उनका “दिल्ली चलो” और “जय हिंद का नारा” आजाद हिंद सेना के लिए प्रेरक मंत्र था।

सुभाष चंद्र बोस अपने जीवन में कितनी बार जेल गए 

सुभाष चंद्र बोस सबसे पहले 16 जुलाई 1921 को जेल गए थे। तब उन्हें 6 महीने की सजा हुई थी। सुभाष चंद्र बोस अपने जीवन में 11 बार जेल गए।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर में कहां सबसे पहले आजाद हिंद फौज का गठन किया

सुभाष चंद्र बोस ने जून 1943 में टोकियो रेडियो स्टेशन से यह घोषणा की की अंग्रेजों से यह आशा करना बिल्कुल भी सही नहीं होगा। (Subhash Chandra Bose Essay In Hindi) कि वह स्वयं अपना साम्राज्य छोड़ देंगे हमें भारत की स्वतंत्रता के लिए स्वयं संघर्ष करना होगा।

सुभाष चंद्र की बेटे का नाम क्या था

नेताजी सुभाष चंद्र की बेटे का नाम अनीता बहुत फाफ है।

सुभाष चंद्र बोस के पिता जी को अंग्रेजों ने कौन सी उपाधि दी

नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पिता जानकीनाथ बॉस को ब्रिटिश सरकार ने रायबहादुर की उपाधि से सम्मानित किया।

 

सुभाष चंद्र बोस के बारे में 10 लाइन

  1. सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को कटक ओड़िशा में हुआ था।
  2. उनके पिता का नाम जानकीनाथ बॉस तथा माता का नाम प्रभावती देवी था।
  3. सुभाष चंद्र बोस भारत के स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी तथा सबसे बड़े नेता थे।
  4. सुभाष चंद्र बोस जी के द्वारा दिया गया नारा जय हिंद भारत का राष्ट्रीय नारा बन गया।
  5. सुभाष चंद्र बोस जी को नेताजी के नाम से भी जाना जाता है।
  6. सुभाष चंद्र बोस जी को सबसे पहले नेताजी कहकर एडोल्फ हिटलर ने पुकारा था।
  7. उनके पिता श्री जानकी नाथ बोस ने अंग्रेजों के दमन चक्र के विरोध मैं रायबहादुर की उपाधि लौटा दी थी।
  8. सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज की स्थापना की थी।
  9. नेता जी को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का दो बार अध्यक्ष चुना गया।
  10. सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु 18 अगस्त 1945 को ताइपे में एक विमान दुर्घटना के दौरान हुई थी।

सुभाष चंद्र बोस पर कविता 

यह कविता गोपाल प्रसाद जी व्यास द्वारा रचित खूनी हस्ताक्षर है यह यह कविता बर्मा की उस घटना का वर्णन करती है जब आजाद हिंद फौज का निर्माण हो रहा था. यह कविता बताती है कि देश के लिए जीने की श्रद्धा शक्ति सामर्थ वह हर एक में हो सकता है। लेकिन देश के लिए मर मिटने का जज्बा सुभाष चंद्र बोस जैसे लोगों में होता है।

कविता

वह खून कहो किस मतलब का जिसमें उबाल का नाम नहीं, वह खून कहो किस मतलब का आ सके देश के काम नहीं, वह खून कहो किस मतलब का जिसमें जीवन न रवानी है, जो पर्वत होकर बहता है वह खून नहीं है पानी है।

उस दिन लोगों ने सही-सही खून की कीमत पहचानी थी। जिस दिन सुभाष ने बर्मा में मांगी उनसे कुर्बानी थी।

बोले स्वतंत्रता की खातिर बलिदान तुम्हें करना होगा, तुम बहुत जी चुके हो जग में लेकिन आगे तुम्हें मरना होगा।

आजादी के चरणों में जो जयमाला  चढ़ाई जाएगी वह सुनो तुम्हारे शीशों के फूलों से गुथी जाएगी।

आजादी का संग्राम कहां पैसों पर खेला जाता है, यह शीश कटाने का सौदा नंगे सर झेला जाता है।

यह कहते कहते वक्ता की आंखों में खून उतर आया, मुख रक्त वर्ण चमक उठा दमकी उनकी रक्तिम काया आ जानू बहुत ऊंची करके बे बोले रक्त मुझे देना इसके बदले में भारत की आजादी तुम मुझसे लेना।

हो गई सभा में उथल-पुथल सीने में दिल न समाते थे,स्वर इंकलाब के नारों के कोसों तक छाए जाते थे। हम देंगे खून स्वर यही सुनाई देते थे। रण में जाने को युवक खड़े तैयार दिखाई देते थे।

बोले सुभाष इस तरह नहीं बातों से मतलब सरता है लो यह कागज़ है कौन यहां आकर हस्ताक्षर करता है पर यह साधारण पत्र नहीं आजादी का फरवाना है इस पर तुमको अपने तन का कुछ रक्त गिराना है।

वह आगे आए जिसके तन में खून भारतीय बहता है वह आगे आए जो अपने को हिंदुस्तानी कहता हूं वह आगे आए जो इस पर खूनी हस्ताक्षर देता हूं मैं कफ़न बढ़ाता हूं आए जो हंस कर इसको लेता हूं।

सारी जनता हुंकार उठी हम आते हैं हम आते हैं, माता के चरणों में यह लो हम अपना रक्त गिराते हैं साहस से बढ़े उस दिन युवक देखा बढ़ते ही आते थे। साथ छुरी और कटारियो से वह अपना रक्त गिराते थे। फिर उसी रक्त की स्याही में अपनी कलम डुबाते और आजादी के परवाने पर हस्ताक्षर करते जाते थे।

उस दिन तारों ने देखा था हिंदुस्तानी विश्वास नया जब लिखा रणवीरों ने खून से इतिहास नया

”जय हिन्द जय भारत “

 

 

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