महिला सशक्तिकरण पर निबंध – Women Empowerment Essay For UPSC 2021/2022

दोस्तों आज की इस पोस्ट में हम आपके लिए महिला सशक्तिकरण पर एक निबंध (Women Empowerment Essay) लेकर आए हैं। महिला सशक्तिकरण एक सामाजिक मुद्दा भी है, और एक आर्थिक मुद्दा भी है , एक राजनीतिक मुद्दा भी है। इस पोस्ट में हम जानेंगे कि महिला सशक्तिकरण क्या है। और इससे हमें क्या समझने की जरूरत है।

महिला सशक्तिकरण पर निबंध – Women Empowerment Essay For UPSC 2021/2022

महिला सशक्तिकरण पर निबंध - Women Empowerment Essay For UPSC 2021/2022
महिला सशक्तिकरण पर निबंध

अर्थ एवं परिभाषा

सशक्तिकरण शब्द अंग्रेजी भाषा के Empowerment का हिंदी रूपांतरण है, इसमें em अर्थ होता है। “में” ( in) और सशक्तिकरण (Empowerment) का शाब्दिक अर्थ है शक्ति में होना अर्थात सशक्त होना।

महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment Essay) से तात्पर्य ऐसी विचारधारा से है जो महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने उन्हें आत्म निर्णय का अधिकार प्रदान करने समाज में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने का समर्थन करती है।

महिला सशक्तिकरण संसार भर की महिलाओं को सशक्त बनाने की एक मुहिम है। जिससे महिलाये स्वमं फैसले ले सकती है।

महिला सशक्तिकरण को इस प्रकार परिभाषित किया जा सकता है, कि इससे महिलाओं में उस शक्ति का विकास होता है, जिससे वह अपने जीवन से जुड़े हर फैसले स्वयं ले सकते हैं। समाज में उनके वास्तविक अधिकार को प्राप्त करने के लिए उन्हें सक्षम बनाना ही महिला सशक्तिकरण है।

आज के आधुनिक युग में महिला सशक्तिकरण एक विशेष चर्चा का विषय है। हमारे शास्त्रों में नारी के महत्व को बहुत महत्वपूर्ण बताया है।

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमंते तत्र देवता

अर्थात जहां नारी की पूजा होती है, वहाँ देवता निवास करते है। भारत मे लैगिक विभेद एक ज्वलंत मुद्दा है, लोग आज भी पुरुष प्रधानता जैसी मानसिकता से ग्रस्त है।

आधुनिक समय मे नारी के चरित्र के साथ खिलवाड़ हो रहा है। वर्तमान समय मे हमारे सामने कई ऐसे उदाहरण है।
जैसे – सन 2012 में दिल्ली में घटित निर्भया कांड, आदि

महिला सशक्तिकरण क्यों आवश्यक है ( Why is women empowerment necessary )

भारत मे लगभग 50% आवादी महिलाओं की है, (Women Empowerment Essay)  अतः हम कह सकते हैं। कि महिलाएं समाज की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करती हैं ।अतः देश के विकास में इनका योगदान अति आवश्यक है। हालाकि 50% आवादी होने के बाबजूद भी संसद में महिलाओं की सीटों की संख्या 20% से भी कम है।

“अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार” यदि भारत में महिलाओं को पर्याप्त अवसर प्रदान किए जाते हैं, और श्रमबल में उनकी भागीदारी पुरुषों के बराबर हो जाए तो भारत की विकास दर 27 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।

महिलाओं के हित मे फैसले तभी लिये जायेगे जब वहाँ संसद में भी महिलाएं होंगी। समावेशी विकास महिलाओं की भागीदारी के बिना असंभव है।

महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment Essay) से महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार लाना है। ताकि उन्हें रोजगार , शिक्षा , आर्थिक विकास में बराबरी के अवसर मिल सके।

जिससे वह सामाजिक स्वतंत्रता तथा तरक्की प्राप्त कर सके। यह वह तरीका है। जिसके द्वारा महिलाएं भी पुरुषों की तरह अपनी हर आकांक्षाओं को पूरा कर सके।

भारत मे महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment Essay) की आवश्यकता इसलिये पड़ी क्योकि प्राचीन समय से भारत मे लैंगिक असमानता थी। और शुरू से ही भारत पुरुष प्रथान देश है। प्राचीन भारतीय समाज दूसरी भेदभाव पूर्ण दस्तूरों के साथ सती प्रथा, नगरवधू व्यवस्था , दहेज प्रथा , यौन हिंसा , बाल मजदूरी , बाल विवाह आदि परंपरा थी।

इनमे से कई सारी kuप्रथाएँ आज भी समाज मे उपस्थित है। भारत सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण के लिये कई सारी योजनाए चलाई जा रही है।

महिला एवं बाल विकास कल्याण मंत्रालय तथा भारत सरकार द्वारा भारतीय महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना , महिला हेल्पलाइन योजना , उज्जवला योजना , sukanya smrdhi yojna , mahila sakti kendra yojna , pradhan mantri koshal vikas yojna महिला शक्ति केंद्र जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं।

भारत में महिला सशक्तिकरण की स्थिति

जनवरी 2020 में प्रकाशित विश्व बैंक की रिपोर्ट “वूमेन बिजनेस एंड लॉ” ( Women Business And Law, 2020 ) के अनुसार आर्थिक तौर पर महिलाओं को सशक्त बनाने के मामले में विश्व के 190 देशों में भारत का स्थान 117 वां है।

बड़ी चिंता का विषय  तो यह है कि भारत रवांडा और लिसोटो जैसे छोटे देशों से भी बहुत पीछे है।

2019 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट ( Progress of the world’s women 2019-2020 ) मैं कहा गया कि आर्थिक वृद्धि होने के बावजूद भारत में महिलाओं की श्रमबल में निरंतर गिरावट आ रही है। श्रमबल में महिलाओं की गिरावट के संबंध में भारत विश्व में पहले स्थान पर है यह एक बहुत ही चिंता का विषय है।

भारत की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाली महिलाओं का भारत की GDP में योगदान 20% से भी कम रहा है।

जिस तरह से भारत सबसे तेज आर्थिक विकास प्राप्त करने वाले देशों में शामिल हुआ है, उसे देखते हुए निकट भविष्य में भारत को महिला सशक्तिकरण के लक्ष्य को प्राप्त करने पर भी ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।

हमें महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment Essay) के इस कार्य को समझने की आवश्यकता है क्योंकि इसी के द्वारा देश में लैंगिक समानता और आर्थिक विकास को प्राप्त किया जा सकता है। भारतीय समाज में वास्तव में महिला सशक्तिकरण लाने के लिए महिलाओं के खिलाफ बुरी प्रथा के मुख्य कारणों को समझना और उन्हें हटाना होगा।

जो कि पितृसत्तात्मक और पुरुष प्रधान नियुक्त व्यवस्था है। जरूरत है कि हम संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों को भी बदलने का प्रयास करें।

नारी ही शक्ति है नर की,
नारी ही शोभा है घर की।
जो उसे उचित सम्मान मिले,
घर में खुशियों के फूल खिले।।

जिस तरह एक पंख से किसी पक्षी का उड़ पाना असम्भव है। उसी तरह से बिना महिलाओं की स्थिति के सुधार के इस संसार का कल्याण सम्भव नही है। किसी लेखक ने ठीक ही कहाँ है।

“सशक्त नारी से ही बनेगा सशक्त भारत”

भारत सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण के लिये किये गये प्रयास

  • राष्ट्रीय महिला सशक्तिकरण 2001 में लागू
  • तीन तलाक पर कानून बनाना
  • बालिका अनिवार्य शिक्षा 2001
  • महिला आरक्षण विधेय
  • महिला थानों की स्थापना
  • महिलाओं का यौन शोषण एक्ट 2013
  • बाल विवाह रोकथाम एक्ट 2006
  • दहेज रोकथाम 1961

आधुनिक समाज महिलाओं के अधिकारों को लेकर ज्यादा जागरूक है, कि कई सारे स्वयंसेवी समूह और एनजीओ इस दिशा में कार्य कर रहे हैं।

महिला सशक्तिकरण के समक्ष चुनौतियां

  1. पुरुष प्रधान समाज ( Male dominated Society )
  2. रुढिगत परंपराएं जिन्हें धर्म के आधार पर उचित करार देने का प्रयास किया जाता है। ( Traditional traditions, which are attempted to justified on the basis of religion )
  3. राजनीतिक असंवेदनशीलता ( Political insensitivity )
  4. शिक्षा का अभाव ( Lack of education )
  5. कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन शोषण ( Sexual abuse of women at workplace )
  6. महिलाओं के लिए पर्याप्त सुरक्षित परिवेश ना होना ( Not having a safe enough environment for women )
  7. महिला सशक्तिकरण को सुधारने के लिये सुझाव
  8. प्रारंभिक शिक्षा तथा उच्च शिक्षा को बढ़ावा देना ( Promoting elementary education and higher education )
  9. वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना ( Promote scientific thinking )
  10. महिलाओं के साथ जुड़े अपराधों का जल्दी से निपटारा हो ( Rapid disposal of crimes related to women )
  11. कार्यस्थल पर महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण निर्मित करना ( Create a safe environment for women at the workplace )
  12. लैंगिक समता विरोधी गतिविधियों पर अंकुश ( Curb anti-gender parity activities )
  13. महिलाओं को संसद एवं राज्य विधानमंडल में एक तिहाई आरक्षण देने वाले लंबित विधेयक को शीघ्र पास किया जाना चाहिए.
  14. महिला सशक्तिकरण की दिशा में ग्रामीण स्तर पर अधिक ठोस प्रयास करने चाहिए।

महिला सशक्तिकरण पर मेरे कुछ विचार -Women Empowerment Essay

भारत का प्रत्येक पुरुष जो प्रतिदिन कार्य करता है। नौकरी करता है उसे सरकार या कंपनियों के द्वारा सप्ताह में 1 दिन की छुट्टी सुनिश्चित ही मिल जाती है। और यह भारत के प्रत्येक पुरुष का मानव अधिकार माना जाता है।

लेकिन क्या आपने कभी अपने दिमाग के घोड़े को दौड़ाया है, मेरे कहने का मतलब है आपने कभी यह विचार किया है जो महिला प्रतिदिन 1 साल के 365 दिन लगातार काम करती है क्या उनका कोई मानव अधिकार नहीं है। क्या परिवार का यह कर्तव्य नहीं की उसे सप्ताह में एक दिन छुट्टी दे।  क्या भारतीय समाज का यह दायित्व नहीं की महिला को एक दिन की छुट्टी देकर परिवार के लोग  उपवास रखे या फिर होटल से खाना मगाये।

हमने इस बात पर कभी ध्यान ही नहीं दिया।  हमारी मानसिकता में घर का काम कोई काम नहीं है।  इस वजह से हमने इस बारे में कभी सोचने का प्रयास नहीं किया।  तो  महिला सशक्तिकरण के बारे में बाद में फैसले लेगी।  लेकिन भारतीय समाज और हमारे परिवार को महिला सशक्तिकरण के लिये अपने परिवार से ही शुरुआत करनी  चाहिये ।

मुझे उम्मीद है , की इस पोस्ट को पढ़कर आपको बहुत अच्छा लगा होगा, महिलाओ  के बारे में आप क्या सोचते हो अपने विचार कमेंट बॉक्स में रखे। और इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करे।

” जय हिन्द जय भारत  “

 

 

 

 

 

 

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